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हरियाणा में पेड़ों की चांदी! 75 साल पुराने वृक्षों को मिलेगी ₹3000 पेंशन, जानें कैसे उठाएं लाभ

Mar 23, 2026 5:32 PM

हरियाणा। हरियाणा की धरती पर अब सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी यानी पुराने पेड़ों को भी 'सम्मान भत्ता' मिल रहा है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्राण वायु देवता योजना' (PVDPS) के तहत 75 वर्ष की आयु पार कर चुके विशालकाय पेड़ों के संरक्षण के लिए सालाना 3,000 रुपये की पेंशन राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हालिया बजट सत्र में इस योजना को नई गति देते हुए घोषणा की है कि आने वाले समय में पेड़ों की देखभाल करने वाले हजारों और लोगों को इस आर्थिक मदद से जोड़ा जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण का 'हरियाणा मॉडल': देश में पहली बार ऐसी पहल

साल 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा शुरू की गई यह योजना आज देशभर के लिए एक नजीर बन गई है। हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने पेड़ों की कटाई रोकने और उनके संरक्षण के लिए सीधे नकद प्रोत्साहन (DBT) का रास्ता चुना है। वर्तमान में प्रदेश भर के 3,819 पेड़ों के मालिक इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सीएम नायब सैनी ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 1,541 नए पेड़ों की पहचान कर उन्हें इस दायरे में लाया जाएगा। इस पेंशन राशि का मुख्य उद्देश्य पेड़ों के लिए खाद, पानी और घेराबंदी (Fencing) जैसे खर्चों में मालिकों की मदद करना है।

क्यों जरूरी है इन 'प्राण वायु देवताओं' को बचाना?

मुख्यमंत्री ने योजना के वैज्ञानिक और पारिस्थितिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बड़ी उम्र के पेड़ न केवल अधिक ऑक्सीजन छोड़ते हैं, बल्कि उनका विशाल फैलाव पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए एक पूरा ईको-सिस्टम तैयार करता है। ये पुराने वृक्ष 'कार्बन सिंक' के रूप में काम करते हैं और बढ़ते प्रदूषण के बीच शुद्ध हवा का सबसे बड़ा स्रोत हैं। सरकार का मानना है कि पेंशन मिलने से लोगों के मन में पेड़ों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा है, जिससे अब लोग पुराने पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें सहेजने में गर्व महसूस कर रहे हैं।

किसानों को भी मिलेगी प्रोत्साहन राशि

बजट घोषणा के अनुसार, सरकार केवल पुराने पेड़ों तक ही सीमित नहीं रहेगी। दुर्लभ और संकटग्रस्त वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी किसानों को अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। पेंशन की यह राशि सीधे पेड़ मालिक के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। अधिकारियों के मुताबिक, वन विभाग की टीमें गांवों और शहरों में सर्वे कर ऐसे पुराने पेड़ों को चिन्हित कर रही हैं जो ऐतिहासिक या पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

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