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हरियाणा के राशन कार्डधारकों की मौज: अब 5-G स्पीड से मिलेगा अनाज, पुरानी मशीनें बाहर

May 07, 2026 3:24 PM

हरियाणा। हरियाणा में राशन वितरण प्रणाली अब पूरी तरह नए अवतार में नजर आने वाली है। सरकार ने उन 2-G मशीनों को बदलने का काम शुरू कर दिया है जो पिछले करीब एक दशक से डिपो संचालकों और उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनी हुई थीं। अक्सर देखा जाता था कि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क न होने या मशीन के धीमे होने के कारण बुजुर्गों और महिलाओं को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ता था। अब 5-G की एंट्री के साथ ही यह पूरी व्यवस्था न केवल रफ्तार पकड़ेगी, बल्कि तकनीक के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की सूची में हरियाणा और ऊपर आ जाएगा।

नेटवर्क की किल्लत होगी दूर, बायोमेट्रिक होगा फास्ट

राशन वितरण व्यवस्था में होने वाले इस बड़े बदलाव को लेकर 'आल राशन डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन' ने भी उत्साह जताया है। एसोसिएशन के प्रदेश मीडिया प्रभारी गुरतेज सिंह सोढ़ी के मुताबिक, पुरानी मशीनों की सबसे बड़ी समस्या कनेक्टिविटी थी। 2-G तकनीक आज के दौर में पिछड़ चुकी है। नई मशीनों में न केवल तेज इंटरनेट की सुविधा है, बल्कि इनका बायोमेट्रिक सेंसर भी काफी उन्नत है। कई बार मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के अंगूठे के निशान घिस जाने के कारण पुरानी मशीनें उन्हें पहचान नहीं पाती थीं, लेकिन नई तकनीक से इस समस्या में काफी सुधार आने की उम्मीद है।

उपभोक्ताओं से धैर्य रखने की अपील

विभागीय स्तर पर मशीनों को बदलने की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। गुरतेज सिंह सोढ़ी ने कार्डधारकों से अपील की है कि जब तक उनके क्षेत्र के डिपो पर मशीनें अपडेट नहीं हो जातीं, तब तक वे धैर्य बनाए रखें। उन्होंने सलाह दी है कि गांव में मुनादी होने या आधिकारिक सूचना मिलने के बाद ही राशन लेने के लिए पहुंचें ताकि भीड़ जमा न हो। यह कदम 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत विभाग का एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

9 साल का इंतजार हुआ खत्म

बता दें कि साल 2015-16 के आसपास जब ई-पॉस मशीनों की शुरुआत हुई थी, तब वे तत्कालीन तकनीक के हिसाब से ठीक थीं। लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों ही जवाब दे चुके थे। डिपो पर अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती थी क्योंकि उपभोक्ता को लगता था कि डिपो होल्डर जानबूझकर देरी कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद डेटा प्रोसेसिंग की गति कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे लाभार्थियों को बिना किसी झंझट के अपना हक मिल सकेगा।

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