Search

बुखार को न लें हल्के में, स्वास्थ्य विभाग ने भाना में चलाया 'रैपिड फीवर मास सर्वे'।

May 07, 2026 4:01 PM

कैथल। गर्मी के साथ-साथ अब मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिसे देखते हुए राजौंद स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। गुरुवार को गांव भाना (पीएचसी करोड़ा) में विभाग की ओर से 'रैपिड फीवर मास सर्वे' अभियान चलाया गया। एसएमओ डॉ. संदीप सिंह के दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने न केवल बुखार के मरीजों की स्क्रीनिंग की, बल्कि ग्रामीणों को यह भी समझाया कि सावधानी ही इन बीमारियों का सबसे बड़ा इलाज है। विभाग का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि लोग अपने घरों के भीतर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों की नर्सरी बनता है।

डेंगू और मलेरिया के फर्क को समझाया, लक्षणों पर दी विशेष जानकारी

सर्वे के दौरान दो अलग-अलग टीमों ने गांव के हर कोने में दस्तक दी। हेल्थ इंस्पेक्टर राजेश कुमार और उनकी टीम ने ग्रामीणों को बारीकी से समझाया कि मलेरिया और डेंगू के मच्छर अलग-अलग स्वभाव के होते हैं। लोगों को बताया गया कि डेंगू फैलाने वाला 'मादा एडीज' मच्छर अक्सर दिन के उजाले में वार करता है। टीम ने लक्षणों की पहचान साझा करते हुए कहा कि यदि किसी को तेज बुखार के साथ आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर गुलाबी चकत्ते या जोड़ों में गंभीर दर्द महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल का रुख करें।

कूलर और जलभराव पर कड़ाई: 'सप्ताह में एक बार सूखा रखें बर्तन'

जागरूकता अभियान के तहत टीम ने घरों में रखे कूलरों और पानी की टंकियों की भी जांच की। कर्मचारियों ने सलाह दी कि कूलर को सप्ताह में कम से कम एक बार पूरी तरह सुखाया जाए। जहां पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है, वहां गड्ढों को मिट्टी से भरने या जमा पानी पर काला तेल डालने के निर्देश दिए गए। साथ ही, रात को सोते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने और मच्छरदानी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। टीम ने स्पष्ट किया कि बुखार आने पर खुद डॉक्टर बनने के बजाय लैब टेस्ट करवाना ही सुरक्षित विकल्प है।

टीबी और एचपीवी वैक्सीन पर भी रहा फोकस

मलेरिया-डेंगू के अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने इस मौके का इस्तेमाल अन्य गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों पर चर्चा के लिए भी किया। आशा कार्यकर्ताओं और एमपीएचडब्ल्यू कर्मचारियों ने महिलाओं को एचपीवी वैक्सीन के महत्व और टीबी के शुरुआती लक्षणों के बारे में जागरूक किया। इस अभियान में संदीप कुमार, बबीता, राजवंती और आशा कार्यकर्ता पूजा, बिमला व अन्य ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य संवेदनशील गांवों में भी इसी तरह के सघन सर्वे किए जाएंगे।

You may also like:

Please Login to comment in the post!