स्कूलों में हिंदी बोलने पर जुर्माना! अभिभावक सेवा मंच ने शिक्षा मंत्री को सुनाई स्कूलों की मनमानी।
May 07, 2026 3:09 PM
यमुनानगर । यमुनानगर के निजी स्कूलों में री-एडमिशन के नाम पर हो रही अवैध वसूली और मनमाने ढंग से बढ़ाई गई फीस का मुद्दा अब राजधानी के गलियारों तक पहुंच गया है। अभिभावक सेवा मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के दरबार में दस्तक देकर निजी स्कूलों की कथित मनमानी की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की है। समाजसेवी महेंद्र मित्तल और संजय मित्तल की अगुआई में पहुंचे इस शिष्टमंडल ने मंत्री को बताया कि कैसे स्कूल संचालक शिक्षा के मंदिर को व्यापारिक अड्डा बना चुके हैं। शिक्षा मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया कि अभिभावकों की जेब पर डाका डालने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी रिपोर्ट पर गहनता से गौर किया जाएगा।
नियमों की धज्जियां: 10% से ज्यादा फीस वृद्धि और री-एडमिशन का खेल
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के सामने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार कोई भी स्कूल पिछले साल की तुलना में 10.13 प्रतिशत (5% मानक + 5.13% कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। बावजूद इसके, कई स्कूलों ने इस सीमा को पार कर लिया है। इसके अलावा, छठी, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में दोबारा दाखिला शुल्क (री-एडमिशन चार्ज) लेना पूरी तरह गलत है, क्योंकि अभिभावक पहले ही लाखों रुपये एडमिशन फीस के नाम पर दे चुके होते हैं। मांग की गई है कि अभिभावकों से जो अतिरिक्त पैसा वसूला गया है, उसे ब्याज सहित वापस कराया जाए।
हिंदी बोलने पर जुर्माना और भारी-भरकम किताबों का बोझ: सरकार से हस्तक्षेप की मांग
मुलाकात के दौरान समाजसेवी महेंद्र मित्तल ने एक चौंकाने वाला मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूल छात्रों द्वारा मातृभाषा हिंदी बोलने पर न केवल सजा देते हैं, बल्कि जुर्माना भी वसूलते हैं। यह सीधे तौर पर हमारी भाषा का अपमान है। इसके साथ ही, स्कूलों में एनसीईआरटी (NCERT) का पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई है ताकि अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के चंगुल से बचाया जा सके। मंच ने सुझाव दिया कि जिस तरह स्कूल बसों का रंग पीला अनिवार्य है, उसी तरह सभी स्कूलों की वर्दी (यूनिफॉर्म) भी एक समान होनी चाहिए ताकि समानता का भाव बना रहे।
जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी, बड़े स्कूलों पर गिरेगी गाज
अभिभावक सेवा मंच ने हाल ही में 35 निजी स्कूलों की जांच में पाई गई कमियों का हवाला देते हुए मांग की है कि अब उन बड़े स्कूलों की भी घेराबंदी की जाए जिनमें एक हजार से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि अगर बारीकी से जांच हुई, तो करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आएंगे। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने शिष्टमंडल को आश्वस्त किया कि विभाग जल्द ही इन शिकायतों पर संज्ञान लेगा। उन्होंने कहा कि छात्र हित सर्वोपरि हैं और जो भी विद्यालय नियमों का उल्लंघन कर अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।