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कैथल में सफाई व्यवस्था बेपटरी: कर्मचारियों ने 11 मई तक खींची हड़ताल की लकीर, कूड़े के ढेरों के बीच सांस लेने को मजबूर शहर

May 07, 2026 3:40 PM

कैथल।  कैथल जिले में सफाई व्यवस्था को लेकर संकट गहराता जा रहा है। अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे नगरपालिका कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी हड़ताल को आगामी 11 मई तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को नगर परिषद कार्यालय के बाहर सैकड़ों की संख्या में जुटे सफाई कर्मियों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार पर वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए। जिले के करीब 800 सफाई कर्मचारियों के इस सामूहिक अवकाश ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। हालात यह हैं कि सड़कों और गलियों के मोड़ पर अब कचरे के ढेर सड़ने लगे हैं, जिससे महामारी फैलने का डर भी पैदा हो गया है।

सरकार की घोषणाएं सिर्फ कागजों तक? वेतन और पक्का करने के मुद्दे पर गहराया रोष

प्रदर्शन की कमान संभाल रहे नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य जॉइंट सेक्रेटरी विक्की टांक और जिला प्रधान गौरव टांक ने सीधे तौर पर प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप मढ़ा। नेताओं का कहना है कि नवंबर 2024 में जींद के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी सफाई कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी कर उन्हें क्रमशः 26 हजार और 27 हजार रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी यह वादा फाइलों में ही दफन है। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में पुराने वेतन पर गुजारा करना नामुमकिन हो गया है।

पक्का करने का वादा भी अधर में, अब 'आर-पार' की तैयारी

आंदोलनकारियों का गुस्सा केवल वेतन तक सीमित नहीं है। 2023 में पे-रोल के कर्मचारियों को पक्का करने के लिए जो कमेटी बनाने और पत्र जारी करने की बात कही गई थी, उसे लेकर भी धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। विक्की टांक ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे दो दिन और सरकार के रुख का इंतजार करेंगे। यदि इस बीच कोई ठोस समाधान या वार्ता का न्योता नहीं आता, तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन में तब्दील हो जाएगी।

जनता पर पड़ने लगी हड़ताल की मार, सड़ने लगा कचरा

हड़ताल की इस जंग में सबसे ज्यादा खामियाजा कैथल की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कैथल के अलावा पूंडरी, चीका और कलायत जैसे कस्बों में भी सफाई कर्मी काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। सड़कों पर झाड़ू न लगने और घर-घर से कचरा न उठने की वजह से गलियां डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो रही हैं। प्रशासन के पास फिलहाल इस स्थिति से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक योजना नजर नहीं आ रही है, जिससे शहर में अव्यवस्था का खतरा और बढ़ गया है।


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