हांसी में प्राइवेट बस वालों की मनमानी: सरकारी पास को मानने से इनकार, यात्रियों में भारी गुस्सा
May 07, 2026 3:47 PM
हांसी। हांसी में परिवहन व्यवस्था इस वक्त पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है। एक तरफ सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों में छात्र-छात्राओं और बुजुर्गों के लिए रियायती सफर के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ हांसी की सड़कों पर दौड़ रही निजी बसें इन दावों की धज्जियां उड़ा रही हैं। विवाद इतना गहरा है कि प्राइवेट बस वालों ने सीधे तौर पर रोडवेज विभाग को चुनौती दे दी है। इस खींचतान में सबसे ज्यादा वो तबका पिस रहा है जो आर्थिक रूप से कमजोर है और अपनी शिक्षा या इलाज के लिए रोजाना सफर करने को मजबूर है।
"बस में चढ़ने से पहले ही दिखा देते हैं ठेंगा"
हिसार पॉलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र नसीब कुमार की व्यथा अकेले उसकी नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों की है जो पास होने के बावजूद किराया देने को विवश हैं। नसीब कहते हैं, "हमें बस में चढ़ने तक नहीं दिया जाता। कंडक्टर पहले ही पूछ लेता है कि पास है या पैसे? पास का नाम लेते ही बस आगे बढ़ा दी जाती है।" वहीं बुजुर्ग यात्री धर्मवीर और सुभाष का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें सम्मान देने के बजाय बस स्टैंड पर धक्के खाने के लिए छोड़ दिया गया है। विभाग केवल आश्वासन की घुट्टी पिला रहा है।
निजी ऑपरेटर्स का अपना दर्द: "हम चैरिटी कब तक करें?"
इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष भी काफी पेचीदा है। निजी बस एसोसिएशन के जिला प्रधान दिनेश सिंह बडाला ने अपनी आर्थिक तब्दीली का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा रोडवेज को मुफ्त यात्रा के बदले सरकार से करोड़ों का भुगतान मिलता है, लेकिन प्राइवेट ऑपरेटर्स को फूटी कौड़ी नहीं दी जाती। बडाला का कहना है, "बिना किसी सरकारी मदद या सब्सिडी के हम अपनी जेब से घाटा सहकर मुफ्त सवारी नहीं ढो सकते। मामला कोर्ट में है और 16 जुलाई की सुनवाई से पहले हम पीछे नहीं हटेंगे।" उन्होंने मांग की है कि सरकार 'नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड' (NCMC) लागू करे ताकि किराया सीधे ऑपरेटर के खाते में पहुंचे।
अधिकारी नदारद, व्यवस्था लाचार
हांसी के जिला बनने के बाद उम्मीद थी कि परिवहन व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है। यहां आज भी जनरल मैनेजर (GM) जैसे अहम पद खाली पड़े हैं। यातायात प्रबंधक ही किसी तरह काम खींच रहे हैं। जब मीडिया ने रोडवेज के अधिकारियों से इस दबंगई पर सवाल किए, तो वे कैमरे से बचते नजर आए। जिला परिवहन अधिकारी संजय बिश्नोई ने घिसा-पिटा जवाब देते हुए कहा कि 'कार्रवाई जारी है', लेकिन जमीन पर प्राइवेट बसों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही।
16 जुलाई पर टिकी है उम्मीदें
फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। एक तरफ बस संचालकों की अपनी जिद है और दूसरी तरफ रोडवेज की प्रशासनिक लाचारी। छात्र संगठन अब इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि 16 जुलाई को अदालत इस पर क्या फैसला सुनाती है या उससे पहले सरकार कोई बीच का रास्ता निकालकर इन मजबूर यात्रियों को राहत देती है।