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हरियाणा के किसानों की जीत: अब ₹7,721 के भाव बिकेगी सूरजमुखी, हैफेड ने सुधारी अपनी बड़ी गलती

Apr 02, 2026 11:51 AM

हरियाणा। हरियाणा की मंडियों में सूरजमुखी की दस्तक से पहले ही इसके दाम को लेकर मचा बवाल अब शांत होता दिख रहा है। सूरजमुखी उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी यह है कि उन्हें अपनी फसल का पूरा हक मिलेगा। हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ (HAFED) ने साफ कर दिया है कि राज्य में सूरजमुखी की सरकारी खरीद ₹7,721 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही की जाएगी। दरअसल, पिछले दिनों एक सरकारी आदेश में यह भाव काफी कम दर्शाया गया था, जिससे किसानों और विपक्षी दलों में भारी रोष था। अब हैफेड ने उस आदेश को वापस लेते हुए नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

दुष्यंत चौटाला के तीखे तेवर और हैफेड का 'यू-टर्न'

इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सरकार को घेरे में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और हैफेड मिलकर किसानों के साथ धोखाधड़ी का षड्यंत्र रच रहे हैं। दुष्यंत ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी पहले ही तय कर दिया है, तो राज्य की एजेंसियां कम भाव का परिपत्र कैसे जारी कर सकती हैं? उन्होंने ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों का हवाला देते हुए इसे 'जख्मों पर नमक छिड़कने' जैसा बताया। राजनीतिक दबाव और चौतरफा घिरने के बाद हैफेड को अपनी गलती सुधारनी पड़ी।

'टाइपिंग मिस्टेक' या सोची-समझी रणनीति?

हैरानी की बात यह है कि हैफेड ने इस भारी अंतर को महज एक 'लिपिकीय त्रुटि' यानी क्लर्क की गलती बताया है। विभाग की ओर से दी गई सफाई के मुताबिक, 19 मार्च को जो निर्देश जारी हुए थे, उनमें गलती से भाव ₹6,540 प्रति क्विंटल दर्ज हो गया था। जैसे ही यह मामला विभाग के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, 29 मार्च को संशोधित निर्देश जारी कर दिए गए। हैफेड के प्रवक्ता का कहना है कि राज्य सरकार किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मोल देने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर किसानों का आर्थिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

किसानों के लिए क्या हैं निर्देश?

हरियाणा के किसानों के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि इस बार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पहले ही फसल चक्र को प्रभावित किया है। ऐसे में ₹7,721 का भाव मिलना उनके लिए संजीवनी जैसा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अपनी उपज सुखाकर और साफ करके मंडियों में लानी चाहिए ताकि एमएसपी का लाभ लेने में कोई तकनीकी अड़चन न आए। हैफेड ने अपनी सभी जिला इकाइयों को आदेश भेज दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान सीधे उनके खातों में समय पर पहुंचे।

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