हरियाणा में मौसम का 'यू-टर्न': चिलचिलाती धूप के बाद अब आंधी और बारिश का अलर्ट, 5 मई तक आसमान में मचेगी हलचल
May 03, 2026 10:34 AM
चंडीगढ़ (जग मार्ग)। हरियाणा में कुदरत के तेवर इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव भरे नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां सूरज की तपिश पारे को 41 डिग्री के पार ले जा रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने मौसम के मिजाज को पूरी तरह बदल दिया है। कल राजस्थान की सीमाओं से उठी धूल भरी आंधी ने जिस तरह पूरे प्रदेश को अपनी आगोश में लिया, उसने आने वाले दिनों के लिए बड़े बदलाव का संकेत दे दिया है। मौसम विभाग ने अब राज्य के 8 संवेदनशील जिलों में आंधी-तूफान और गरज-चमक के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी कर दिया है।
तापमान का उछाल और जिलों का हाल
बीते 24 घंटों की बात करें तो तेज धूप ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए। प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 2.1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हिसार 41 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे तपता शहर रहा, जबकि रोहतक, सिरसा और फरीदाबाद में भी पारा 40 डिग्री के आसपास झूलता रहा। ताज्जुब की बात यह है कि न्यूनतम तापमान में भी 3.1 डिग्री का उछाल आया है, जिससे रातें भी काफी गर्म महसूस होने लगी हैं। गुरुग्राम में तो रात का पारा 30 डिग्री के करीब पहुंच गया, जो सामान्य से काफी अधिक है।
5 मई तक राहत और आफत दोनों के संकेत
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के मुताबिक, प्रदेश में 5 मई तक मौसम का मिजाज स्थिर नहीं रहेगा। कल रात से सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, नूंह, पलवल, पंचकूला, यमुनानगर और फरीदाबाद जैसे जिलों में तेज हवाओं के साथ छींटे पड़ने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश से चिलचिलाती गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन तेज आंधी जनजीवन के लिए थोड़ी मुश्किलें भी खड़ी कर सकती है।
मई महीने में जारी रहेगी बादलों की लुका-छिपी
मौसम विभाग की मानें तो इस बार मई का महीना वैसा नहीं होगा जैसी आमतौर पर उम्मीद की जाती है। इस बार एक के बाद एक कई पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। इसका मतलब यह है कि पूरे महीने लोगों को कभी चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ेगा, तो कभी अचानक बादलों की गर्जना और बारिश मौसम को सुहावना बना देगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे मौसम के इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी फसलों और अनाज के भंडारण का प्रबंधन करें।