शुरू हुआ साल का दूसरा सबसे पवित्र महीना, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
Apr 03, 2026 12:12 PM
ज्योतिष। आज से हिंदू धर्म के सबसे फलदायी महीनों में से एक 'वैशाख' की शुरुआत हो गई है। ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख का महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और लोक कल्याण का संगम है। उदया तिथि के आधार पर 3 अप्रैल से शुरू हुआ यह पावन काल 1 मई तक चलेगा। स्कंद पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि सतयुग के समान कोई युग नहीं और वैशाख के समान कोई मास नहीं है। इस महीने में भगवान विष्णु के 'माधव' स्वरूप की पूजा की जाती है, इसलिए इसे 'माधो मास' भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इन दिनों संयम और नियम का पालन करता है, उसके जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
स्नान और सूर्य अर्घ्य का पौराणिक महत्व
वैशाख के महीने में सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थान पर स्नान करने का फल अश्वमेध यज्ञ के समान बताया गया है। पद्म पुराण की एक कथा के अनुसार, राजा महीरथ ने केवल वैशाख स्नान के बल पर ही मोक्ष प्राप्त किया था। यदि आप किसी नदी तक नहीं जा सकते, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर पवित्र नदियों का स्मरण करते हुए स्नान कर सकते हैं। इसके बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देना और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना आरोग्य और सौभाग्य प्रदान करता है।
दान की महिमा: गर्मी में राहत पहुंचाना ही असली सेवा
वैशाख की तपती गर्मी में दूसरों को शीतलता प्रदान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन दिनों प्याऊ लगवाना, राहगीरों को जल पिलाना, पंखा, खरबूजा और आम जैसे मौसमी फलों का दान करना चाहिए। मंदिरों में अन्न दान और जरूरतमंदों को सत्तू खिलाने का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा, रोजाना शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है। इन दिनों सात्विक जीवन और ब्रह्मचर्य का पालन मन को शांति प्रदान करता है।
भूलकर भी न करें ये काम, वरना रूठ सकते हैं भाग्य
वैशाख के महीने के लिए शास्त्रों में कुछ कड़े नियम भी बताए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर पुण्य क्षीण हो जाता है। इन दिनों मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा, वैशाख में शरीर पर तेल मालिश करना और दिन के समय सोना वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में सादगी का महत्व है, इसलिए पलंग के बजाय जमीन पर सोना (भूमि शयन) और रात के भोजन को कम करना स्वास्थ्य और अध्यात्म दोनों लिहाज से उत्तम है। इन नियमों का पालन कर आप न केवल मानसिक शांति पा सकते हैं, बल्कि जीवन में समृद्धि के द्वार भी खोल सकते हैं।