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Asian Wrestling Championship: बहादुरगढ़ के सुमित दलाल ने वियतनाम में रचा इतिहास, लगातार दूसरी बार जीता गोल्ड

May 28, 2026 3:52 PM

बहादुरगढ़। हरियाणा की माटी और यहां के अखाड़ों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बादशाहत साबित की है। वियतनाम में 23 मई से शुरू हुई अंडर-23 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप की ग्रीको रोमन शैली में बहादुरगढ़ के पहलवानों ने वो कर दिखाया है, जिस पर पूरे देश को नाज है। झज्जर जिले के मशहूर 'हिन्द केसरी सोनू अखाड़े' के दो जांबाज पहलवानों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में तिरंगा लहराया। इसमें सबसे बड़ी कामयाबी मांडौठी गांव के रहने वाले सुमित दलाल के हिस्से आई, जिन्होंने 63 किलोग्राम भार वर्ग में अपने विरोधियों को चारों खाने चित करते हुए सोने का तमगा (गोल्ड मेडल) अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही सुमित देश के पहले ऐसे पहलवान बन गए हैं, जिन्होंने लगातार दो बार अंडर-23 एशिया चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है।

वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स के किंग अब एशियन गेम्स की तैयारी में

सुमित दलाल के लिए रिकॉर्ड बनाना कोई नई बात नहीं है, इससे पहले भी वह वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के इकलौते पहलवान होने का गौरव हासिल कर चुके हैं। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर दो जूनियर वर्ल्ड, एक अंडर-23 वर्ल्ड और एक सब जूनियर वर्ल्ड मेडल पहले से ही दर्ज हैं। वहीं दूसरी तरफ, बामडोली गांव के रहने वाले हैवीवेट पहलवान हरदीप छिल्लर ने भी 130 किलोग्राम भार वर्ग के मैट पर उतरकर जबरदस्त दांव-पेच दिखाए और देश को कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) दिलाया। हरदीप का सीनियर स्तर पर यह पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट था, हालांकि इससे पहले वे जूनियर वर्ल्ड और एशिया चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी ताकत का अहसास करा चुके हैं।

अखाड़े में जोरदार इस्तकबाल, अब 30 मई को दीक्षा पर टिकी नजरें

पदक जीतने के बाद जब दोनों जांबाज अपने गृह क्षेत्र बहादुरगढ़ पहुंचे, तो अखाड़े में पैर रखने की जगह नहीं थी। खेल प्रेमियों और ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। दोनों पहलवानों ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने गुरु और अर्जुन अवॉर्डी कोच धर्मेंद्र दलाल को दिया। कोच धर्मेंद्र ने गदगद होते हुए कहा कि ये तो बस शुरुआत है, दोनों बच्चों में गजब की प्रतिभा है और आने वाले समय में ये देश को और भी बड़े मेडल देंगे। बातचीत के दौरान चैंपियन सुमित दलाल ने अपने अगले इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा फोकस एशियन गेम्स में पोडियम फिनिश करने और देश के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करने पर है। अखाड़े के लिए खुशियां यहीं खत्म नहीं हो रही हैं, सुमित ने बताया कि आगामी 30 मई को इसी चैंपियनशिप के अंडर-17 वर्ग में उनके ही अखाड़े की महिला पहलवान दीक्षा दलाल भी गोल्ड मेडल के लिए मैट पर अपना दम दिखाएंगी।

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