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झज्जर के मातनहेल में बनेगा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, 40 साल बाद खत्म हुआ युवाओं का इंतजार

Mar 13, 2026 11:52 AM

हरियाणा। हरियाणा की वीर भूमि झज्जर के लिए एक ऐतिहासिक खबर आई है। जिले के मातनहेल गांव में जिस सैनिक स्कूल की मांग पिछले 40 सालों से फाइलों में दबी हुई थी, उसे अब नई संजीवनी मिल गई है। प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी देते हुए यहां सैनिक स्कूल की जगह राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS) बनाने का फैसला किया है। यह संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित होगा, जिससे यहां आधुनिक सुविधाओं और सैन्य अनुशासन का बेहतरीन संगम देखने को मिलेगा। इस फैसले ने न केवल मातनहेल बल्कि पूरे झज्जर और रोहतक बेल्ट के युवाओं में खुशी की लहर दौड़ा दी है।

1987 की घोषणा और बाधाओं का अंत

गौरतलब है कि मातनहेल में सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा पहली बार 1987 में की गई थी। दशकों बीत गए, सरकारें बदलीं, लेकिन प्रशासनिक पेच और कानूनी अड़चनों के चलते यह प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर पाया। कभी जमीन की कमी तो कभी बजट का अभाव आड़े आता रहा। अब सरकार ने इसके स्वरूप को बदलकर इसे मिलिट्री स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि देरी भले ही हुई, लेकिन मिलिट्री स्कूल बनने से क्षेत्र का गौरव और अधिक बढ़ेगा।

61 एकड़ में फैलेगा शिक्षा का नया हब

इस ड्रीम प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए मातनहेल ग्राम पंचायत ने भी बड़ा दिल दिखाया है। पंचायत ने स्कूल के निर्माण के लिए 61 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। ग्रामीण काफी समय से इस मांग को लेकर अड़े हुए थे कि उनकी जमीन का उपयोग केवल रक्षा और शिक्षा से जुड़े संस्थान के लिए ही हो। पंचायत द्वारा हाल ही में पारित नया प्रस्ताव इस संस्थान की स्थापना के लिए अंतिम मुहर माना जा रहा है। अब जल्द ही यहां निर्माण कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

NDA और सेना में भर्ती की राह होगी आसान

झज्जर जिले का रिकॉर्ड रहा है कि यहां का हर दूसरा युवा सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता है। मातनहेल में मिलिट्री स्कूल खुलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बच्चों को बचपन से ही एनडीए (NDA) और भारतीय सशस्त्र बलों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा। अब तक यहां के बच्चों को अच्छी कोचिंग और मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए रेवाड़ी या कुंजपुरा (करनाल) का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही घर के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे इलाके की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में भी बड़े सुधार की उम्मीद है।

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