जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का तीसरा ट्रायल सफल, 75 की रफ्तार से दौड़ी 'ग्रीन ट्रेन'
Mar 21, 2026 11:52 AM
हरियाणा। हरियाणा के जींद में रेलवे के महत्वाकांक्षी 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' प्रोजेक्ट ने एक और पायदान पार कर लिया है। तकनीकी खामियों को दूर करने और दिल्ली में मेंटेनेंस के बाद वापस लौटी हाइड्रोजन ट्रेन का शुक्रवार को इस हफ्ते का तीसरा ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दोपहर करीब साढ़े चार बजे जब यह नीले रंग की आधुनिक ट्रेन जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए रवाना हुई, तो इसे देखने के लिए प्लेटफॉर्म पर भारी उत्सुकता नजर आई। रेल अधिकारियों ने इस बार सावधानी बरतते हुए ट्रेन का केवल एक ही फेरा (राउंड ट्रिप) लगवाया, ताकि सिस्टम पर पड़ने वाले लोड का सटीक आकलन किया जा सके।
इलेक्ट्रोफायर की खराबी बनी चुनौती, टैंकरों के भरोसे चल रहा काम
ट्रायल के मोर्चे पर तो कामयाबी मिल रही है, लेकिन जींद स्थित हाइड्रोजन प्लांट का इलेक्ट्रोफायर अब भी रेलवे के लिए सिरदर्द बना हुआ है। प्लांट में आई तकनीकी खराबी के कारण स्थानीय स्तर पर गैस का उत्पादन फिलहाल ठप है। ऐसे में परीक्षण की निरंतरता बनाए रखने के लिए रेलवे को बाहर से हाइड्रोजन गैस के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। अब तक दो टैंकरों की गैस का इस्तेमाल हो चुका है और शुक्रवार के ट्रायल के लिए तीसरा टैंकर मंगवाया गया। मेधा कंपनी के इंजीनियरों की टीम दिन-रात प्लांट की मरम्मत में जुटी है ताकि कमर्शियल रन से पहले गैस उत्पादन सुचारू हो सके।
सोनीपत तक 90 किलोमीटर का सफर और ठहराव की टेस्टिंग
90 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर ट्रेन की अधिकतम गति 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई। इस पूरे सफर को तय करने में ट्रेन ने लगभग 3 घंटे का समय लिया। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य तकनीकी सुधारों के बाद ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम और इंजन की कार्यक्षमता को जांचना था। 16 मार्च और उसके बाद बुधवार को हुए पिछले दो ट्रायलों में ट्रेन ने दो-दो चक्कर लगाए थे, लेकिन शुक्रवार को केवल एक चक्कर लगवाकर डेटा एकत्रित किया गया। रास्ते में पड़ने वाले हर छोटे-बड़े जंक्शन पर ट्रेन को एक से दो मिनट के लिए रोका गया ताकि स्टेशन मैनेजमेंट और सिग्नलिंग का तालमेल भी परखा जा सके।
भविष्य की रेल: प्रदूषण मुक्त सफर की ओर बढ़ते कदम
जींद से सोनीपत के बीच चल रहे ये परीक्षण भारतीय रेलवे के लिए ऐतिहासिक हैं। हाइड्रोजन ट्रेन न केवल शोर मुक्त है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचता। हालांकि, बार-बार आ रही तकनीकी अड़चनें इसकी नियमित शुरुआत की तारीख को आगे बढ़ा रही हैं। रेल अधिकारियों का कहना है कि मेधा कंपनी के एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में जल्द ही प्लांट की खराबी दूर कर ली जाएगी। इसके बाद ट्रेन को अपनी पूरी क्षमता और तय समय सीमा के भीतर चलाने की दिशा में काम किया जाएगा।