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कैथल के स्कूलों में गूंजा डेंगू के खिलाफ नारा, स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को सिखाए बचाव के गुर

May 16, 2026 4:51 PM

कैथल। बदलते मौसम के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों के खिलाफ अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी है। कैथल के राजौंद में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य निरीक्षक जितेंद्र सिंह ने कहा कि डेंगू एक वायरल बुखार है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से इंसानी शरीर को अपनी चपेट में लेता है। अचानक तेज बुखार आना, आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में ऐंठन, जी मिचलाना और त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना इसके शुरुआती लक्षण हैं। उन्होंने बच्चों के माध्यम से अभिभावकों तक संदेश पहुंचाया कि ऐसे लक्षण दिखने पर खुद से दवाइयां लेने की भूल कतई न करें, क्योंकि कुछ पेनकिलर्स प्लेटलेट्स को तेजी से गिरा सकती हैं।

कूलर से लेकर फ्रिज की ट्रे तक... जहां रुकेगा पानी, वहां पनपेगा 'एडीज'

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि मलेरिया या डेंगू की बीमारी बाहर के गंदे पानी से फैलती है, लेकिन स्वास्थ्य निरीक्षक ने इस भ्रम को दूर किया। उन्होंने बताया कि घरों के भीतर सजावट के लिए रखे मनी प्लांट के गमले, फ्रिज के पीछे की वेस्ट वाटर ट्रे, पक्षियों के पीने के पानी के सकोरे और छतों पर पड़े पुराने टायर डेंगू के मच्छरों के पसंदीदा ब्रीडिंग ग्राउंड हैं। विभाग ने 'हर रविवार-डेंगू पर वार' की तर्ज पर बच्चों से अपील की कि वे अपने घरों में हफ्ते में एक दिन सूखा दिवस मनाएं। जहां पानी खाली करना संभव न हो, जैसे बड़े गड्ढे या नालियां, वहां जले हुए मोबिल ऑयल (काला तेल) का छिड़काव करें ताकि मच्छरों का लार्वा सांस न ले पाए और वहीं खत्म हो जाए।

बीपी और शुगर के खिलाफ गांवों में तैनात हैं सीएचओ, मुफ्त मिलेंगी दवाइयां

इस अवेयरनेस कैंप का दायरा केवल डेंगू तक सीमित नहीं रहा। स्वास्थ्य टीम ने स्कूली बच्चों को उनके माता-पिता और बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी एक जरूरी जानकारी साझा की। जितेंद्र सिंह ने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में अब हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज (शुगर) की बीमारी साइलेंट किलर बन चुकी है। सरकार ने इसके इलाज को अब पूरी तरह विकेंद्रीकृत कर दिया है। अगर गांव के किसी भी व्यक्ति को यह समस्या है, तो उन्हें बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। ग्रामीण स्तर पर बनाए गए वेलनेस सेंटर्स में नियुक्त कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) न केवल इन बीमारियों की मुफ्त जांच करेंगे, बल्कि मरीजों को हर महीने मिलने वाली दवाइयां भी गांव में ही बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।

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