कैथल रेलवे स्टेशन पर सरकारी दावों की खुली पोल, गर्मी के बीच प्यासे मुसाफिर और खराब पड़ा है आरओ
May 18, 2026 1:59 PM
कैथल। उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले कैथल रेलवे स्टेशन पर इन दिनों रेल यात्रियों को सफर की सहूलियत तो दूर, गले को तर करने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा है। स्टेशन परिसर में यात्रियों को शुद्ध और ठंडा पानी मुहैया कराने के दावे के साथ लगाया गया भारी-भरकम आरओ सिस्टम तकनीकी खामियों के चलते दम तोड़ चुका है। पारा लगातार ऊपर जा रहा है, ऐसे में स्टेशन पर पीने के पानी की मुकम्मल व्यवस्था न होना सीधे तौर पर रेलवे प्रशासन की उदासीनता को बयां करता है। वॉटर बूथ पर लगे नलों में प्रेशर इतना कम है कि एक बोतल भरने के लिए मुसाफिरों को मिनटों तक इंतजार करना पड़ता है और कई बार तो इस जद्दोजहद में उनकी गाड़ी तक छूट जाती है।
बच्चों को नहीं पिला सकते साधारण नल का पानी, जेब काटने को मजबूर जनता
रोजाना सैकड़ों की तादाद में कैथल स्टेशन से सफर करने वाले यात्रियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री मनोहर लाल और राजेश ने बताया कि इस झुलसा देने वाली गर्मी में पानी सबसे बुनियादी जरूरत है, लेकिन प्लेटफॉर्म पर आते ही सबसे पहले पानी के लिए भटकना पड़ता है। वहीं, अपने परिवार और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही महिला यात्री सीमा देवी का दर्द भी छलक उठा। उन्होंने कहा कि सफर में बच्चों को ज्यादा प्यास लगती है। स्टेशन के साधारण नलों का गंदा पानी बच्चों को पिलाकर वे बीमार होने का जोखिम नहीं ले सकतीं। ऐसे में हर फेरे पर बीस-बीस रुपये की पानी की बोतलें खरीदना मिडिल क्लास परिवारों की मजबूरी बन चुका है।
पानी के चक्कर में छूट रही ट्रेन, स्थानीय दुकानदारों ने बयां किया सच
स्टेशन के ठीक बाहर दुकान चलाने वाले नितिन ने इस अव्यवस्था के पीछे की एक और कड़वी सच्चाई उजागर की। नितिन के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर पानी न मिलने के कारण मुसाफिर हांफते हुए उनकी दुकान तक दौड़कर आते हैं। कई बार तो ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिलता है कि यात्री अभी पानी की बोतल लेकर पैसे चुका ही रहा होता है कि अंदर ट्रेन हॉर्न बजाकर चल देती है। पानी के चक्कर में कई मुसाफिरों की गाड़ियां मिस हो चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेलवे एक तरफ आधुनिकीकरण के बड़े-बड़े दावे करता है, मगर जमीनी हकीकत यह है कि एक वॉटर फिल्टर तक को समय पर ठीक नहीं कराया जाता।
अफसरों का वही पुराना ढांचा: जल्द दुरुस्त होगी व्यवस्था
पेयजल के इस गंभीर संकट को लेकर जब स्टेशन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के सामने सवाल रखे गए, तो हमेशा की तरह एक बना-बनाया आश्वासन सामने आ गया। रेलवे प्रशासन के नुमाइंदों का कहना है कि आरओ सिस्टम में आई तकनीकी खराबी को जल्द ही मैकेनिक बुलाकर ठीक करवा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि मुसाफिरों की सहूलियत हमारी प्राथमिकता है और पानी की इस किल्लत को ज्यादा दिनों तक नहीं रहने दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि जब अधिकारियों को पता है कि गर्मियों का सीजन चल रहा है, तो इस खराबी को पहले ही दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? क्या रेलवे किसी बड़े हादसे या यात्रियों के बीमार होने का इंतजार कर रहा था?