Search

बाल विवाह के खिलाफ संतों का बड़ा फैसला, अब मंदिरों और सत्संगों से दी जाएगी सीख

Jun 13, 2026 11:55 AM

नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। देश में बाल विवाह जैसी सदियों पुरानी और दकियानूसी कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जारी 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। 'एमडीडी ऑफ इंडिया' और 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' (JRC) संगठन द्वारा चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को अब देश के पूज्य संत समाज और बड़ी धार्मिक संस्थाओं का खुला समर्थन मिल गया है। समाज को नई दिशा दिखाने वाले संत-महात्माओं ने अब खुद आगे बढ़कर इस कुरीति के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है, जिससे इस अभियान को जमीनी स्तर पर एक मजबूत सामाजिक आधार मिलता दिख रहा है।

धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को दिलाई जा रही है शपथ

इस साझा रणनीति के तहत अब विभिन्न प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। धर्मस्थलों पर सिर्फ उपदेश ही नहीं दिए जा रहे, बल्कि वहां आने वाले आम नागरिकों को अपनी चौखट और समाज में बाल विवाह न होने देने की बाकायदा शपथ भी दिलाई जा रही है। इस मुहिम से जुड़े संतों का साफ कहना है कि बाल विवाह केवल एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि यह मासूम बच्चों के बुनियादी अधिकारों का सीधा हनन है। यह कुप्रथा सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा, उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और एक सुरक्षित भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार बनती है।

सत्संग और प्रवचनों के मंच से गूंजेगी कुप्रथा के खिलाफ आवाज

धार्मिक गुरुओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि धर्म का असली काम हमेशा समाज को अंधकार से उजाले की ओर ले जाना और सही राह दिखाना रहा है। ऐसे में बाल विवाह जैसी सामाजिक बीमारियों के खिलाफ बिगुल फूंकना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। संतों ने भरोसा दिया है कि अब से होने वाले सभी बड़े धार्मिक कार्यक्रमों, कथाओं, सत्संगों और प्रवचनों के मंचों का इस्तेमाल इस अभियान को गति देने के लिए किया जाएगा। वहीं, एमडीडी ऑफ इंडिया और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के नुमाइंदों ने संत समाज के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि जब किसी सामाजिक बदलाव के साथ आस्था और धार्मिक संस्थाएं जुड़ जाती हैं, तो उसे जनआंदोलन बनते देर नहीं लगती।

अधिकारियों को सूचना देने में भी आगे रहेंगे धार्मिक संगठन

संत समाज ने स्वयंसेवी संगठनों को आश्वस्त किया है कि वे केवल उपदेशों तक सीमित नहीं रहेंगे। अगर उनके कार्यक्षेत्र या आसपास के गांवों में बाल विवाह की कोई भी गुप्त सूचना मिलती है, तो वे तुरंत इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक विभागों और बाल संरक्षण इकाइयों को देंगे। संतों का मानना है कि जब तक समाज का हर तबका और हर वर्ग एकजुट होकर इस अभिशाप के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं करेगा, तब तक देश को इस कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त कराना मुमकिन नहीं होगा। इस अभियान के जरिए देश के कोने-कोने में यह साफ संदेश भेजा जा रहा है कि हर बच्चे को सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान का अधिकार है, और इसे सुनिश्चित करके ही एक विकसित भारत की नींव रखी जा सकती है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!