हरियाणा के करनाल में बनेगा नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, 600 एकड़ में होगा निर्माण
Mar 08, 2026 2:38 PM
करनाल। हरियाणा में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा प्रोजेक्ट सामने आया है। करनाल जिले में करीब 600 एकड़ भूमि पर नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना बनाई गई है। यह पूरी तरह नया एयरपोर्ट प्रोजेक्ट होगा और सरकार को उम्मीद है कि 2026-27 वित्तीय वर्ष तक इससे जुड़ी सभी औपचारिक मंजूरियां मिल जाएंगी।
इस एयरपोर्ट के बनने से करनाल और आसपास के जिलों को सीधा फायदा मिलने की संभावना है। उद्योग, व्यापार और निवेश से जुड़े नए अवसर खुलेंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
मनोहर लाल खट्टर के संसदीय क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना
करनाल लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करते हैं। वर्ष 2014 में वे करनाल से विधानसभा चुनाव जीतकर पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे।
इस एयरपोर्ट परियोजना को उनके संसदीय क्षेत्र के लिए अहम विकास योजना के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इससे जिले की पहचान और कनेक्टिविटी दोनों मजबूत होंगी।
करनाल विमानन क्लब का भी होगा विस्तार
करनाल में पहले से एक नागरिक विमानन क्लब संचालित है, जो इस क्षेत्र के पुराने क्लबों में गिना जाता है। पहले यह करीब 107 एकड़ क्षेत्र में फैला था, जिसे बढ़ाकर लगभग 171 एकड़ तक विस्तारित किया गया है।
यहां मौजूद रनवे को 3,000 फीट से बढ़ाकर 5,000 फीट तक करने की योजना है। रनवे बढ़ने के बाद छोटे और मध्यम आकार के विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी, जिससे नागरिक उड्डयन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
केंद्रीय स्तर पर भी हुई परियोजना पर चर्चा
इस एयरपोर्ट परियोजना को लेकर नवंबर में नई दिल्ली में अहम बैठक भी हुई थी। उस दौरान मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू के साथ मुलाकात कर इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की थी।
हाल ही में पेश किए गए बजट में भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने करनाल एयरपोर्ट का जिक्र किया। करनाल से बीजेपी विधायक जगमोहन आनंद ने इस घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और इसे क्षेत्र के विकास के लिए दूरदर्शी योजना बताया।
दिल्ली–करनाल आरआरटीएस कॉरिडोर से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
बजट में सड़क, ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं का भी जिक्र किया गया है। क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने के लिए 136 किलोमीटर लंबा दिल्ली–करनाल रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर भी मंजूर किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत 33,051 करोड़ रुपये बताई गई है।
इसके अलावा 93 किलोमीटर लंबा दिल्ली–बावल कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसकी लागत करीब 32,327 करोड़ रुपये आंकी गई है। ये दोनों परियोजनाएं नमो भारत आरआरटीएस नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य बड़े शहरों और जिलों के बीच तेज और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।