कुरुक्षेत्र धान घोटाला: फूड इंस्पेक्टर की ID हैक कर बना डाले फर्जी गेट पास, करोड़ों के गबन की कोशिश
Apr 02, 2026 5:20 PM
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में धान खरीद सीजन के दौरान एक ऐसा शातिराना फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। विभाग के एक इंस्पेक्टर की आईडी और पासवर्ड में सेंधमारी कर करोड़ों रुपये के धान का 'कागजी' खेल खेला गया। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी गाड़ी के मंडी में आए और बिना एक भी दाना उठाए, रिकॉर्ड में 11,529 क्विंटल धान की खरीद और उठान दर्ज कर दिया गया।
साढ़े तीन घंटे में बिछ गया फर्जीवाड़े का जाल
मामले की परतें तब खुलीं जब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पीआर इंचार्ज इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह की आईडी का दुरुपयोग कर 21 फर्जी एग्जिट गेट पास काट दिए गए। 6 अक्टूबर की सुबह 8:59 बजे से दोपहर 12:35 बजे के बीच, यानी महज साढ़े तीन घंटों के भीतर, 27 आढ़तियों के नाम पर 224 जे-फॉर्म (J-Forms) तैयार किए गए। इसके जरिए कुल 30,746 बोरी धान का रिकॉर्ड पोर्टल पर चढ़ा दिया गया।
राइस मिलों की ID से 'इनवर्ड' का खेल
हैरानी की बात यह है कि जैसे ही इंस्पेक्टर की आईडी से गेट पास जनरेट हुए, अगले ही पल चार अलग-अलग राइस मिलों की आईडी से इन्हें 'इनवर्ड' (प्राप्त) भी दिखा दिया गया।
मैसर्स शिव शक्ति राइस ट्रेडिंग, पिपली: 7 गेट पास के जरिए 10,586 बोरी।
श्रीगणेश राइस मिल (यूनिट 1 व 2), दूधला: 7 गेट पास से करीब 9,600 बोरी।
महादेव सॉल्वेंट, पिपली: 7 गेट पास के तहत 10,523 बोरी धान का रिकॉर्ड दर्ज।
जांच में सामने आया कि जिन गाड़ी नंबरों (HR55V-9883, HR55K-1006 आदि) का इस्तेमाल गेट पास में किया गया, वे असल में मंडी पहुंचे ही नहीं थे। यानी पूरा खेल सिर्फ कंप्यूटर की स्क्रीन पर खेला गया ताकि सरकारी खजाने से करोड़ों का भुगतान डकारा जा सके।
इंस्पेक्टर का दावा— "मैंने तो आधे घंटे में ही चेता दिया था"
इस मामले में विभाग ने इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह को 12 मार्च को निलंबित कर दिया है, लेकिन कुलदीप का अपना ही तर्क है। उनका कहना है कि 6 अक्टूबर को जैसे ही उन्हें शिव शक्ति राइस मिल के मालिक का फोन आया, उन्होंने तुरंत पोर्टल चेक किया। कुलदीप का दावा है कि दोपहर 1:20 बजे ही उन्होंने तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) राजेश आर्य को लिखित और मौखिक शिकायत देकर इन गेट पासों को डिलीट करने और पेमेंट रोकने की गुहार लगाई थी।
भाकियू के तीखे सवाल: क्या 'ऊपर' तक जुड़े हैं तार?
इस पूरे प्रकरण ने भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) को भी मैदान में उतार दिया है। भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आईडी-पासवर्ड का नियंत्रण केवल इंस्पेक्टर तक सीमित नहीं होता, इसका एक्सेस DFSC कार्यालय के पास भी होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इंस्पेक्टर ने समय रहते शिकायत दे दी थी, तो अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लेकर गेट पास ब्लॉक क्यों नहीं किए? भाकियू ने इस मामले में तत्कालीन DFSC की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जांच में पुष्टि— न गाड़ी आई, न धान उठा
पिहोवा के नायब तहसीलदार द्वारा की गई शुरुआती जांच ने इस फर्जीवाड़े पर मुहर लगा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड में दिखाए गए धान का वास्तविकता में कोई वजूद नहीं था। फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस ने इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह की शिकायत पर अज्ञात हैकर्स या संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अब पुलिस आईपी एड्रेस (IP Address) के जरिए उस 'लोकेशन' तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां से इस डिजिटल सेंधमारी को अंजाम दिया गया।
क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या विभाग के भीतर बैठे किसी 'विभीषण' का काम? कुरुक्षेत्र की मंडियों में चर्चा गर्म है कि इस सिंडिकेट के तार बहुत गहरे जुड़े हो सकते हैं।