देहदान से समाज को नई दिशा: कुरुक्षेत्र के इस परिवार के साहस को हर कोई कर रहा सलाम
May 01, 2026 1:03 PM
कुरुक्षेत्र। मौत के बाद भी दुनिया के काम आने का जज्बा बिरले लोगों में ही होता है। कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलियां गांव में एक ऐसा ही प्रेरक मामला सामने आया है, जहां 57 वर्षीय रघुबीर इन्सां की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने पार्थिव देह को मेडिकल शोध के लिए दान कर दिया। बुधवार देर रात जब रघुबीर इन्सां ने अपनी अंतिम सांस ली, तो शोक में डूबे परिवार ने दुख की घड़ी में भी उनके उस संकल्प को याद रखा जो उन्होंने जीते-जी लिया था। रघुबीर इन्सां ने डेरा सच्चा सौदा के माध्यम से देहदान का आवेदन किया था, जिसे अब उनके परिवार ने पूरा कर समाज के सामने एक नई राह दिखाई है।
बीमारी के बावजूद नहीं डगमगाया इरादा
रघुबीर इन्सां पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे, लेकिन अपनी बीमारी के दौरान भी वे अक्सर इस बात का जिक्र करते थे कि मृत्यु के पश्चात उनकी देह किसी न किसी रूप में मानवता के काम आनी चाहिए। उनके पुत्र ऋतिक इन्सां ने भावुक होते हुए बताया कि पिता हमेशा कहते थे कि शरीर तो अंत में मिट्टी ही होना है, ऐसे में अगर यह किसी शोध या मेडिकल छात्र की शिक्षा के काम आ सके, तो इससे बड़ा पुण्य और कुछ नहीं होगा। पिता की इसी अंतिम इच्छा का मान रखते हुए परिवार ने देहदान का फैसला लिया।
नम आंखों और सम्मान के साथ दी गई विदाई
वीरवार को जब रघुबीर इन्सां की अंतिम विदाई का समय आया, तो माहौल काफी भावुक था। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर कमेटी के सैकड़ों सेवादारों ने गांव में एकत्र होकर एक लंबी मानव शृंखला बनाई और अपने साथी को सलामी दी। फूलों से विशेष रूप से सजाई गई एम्बुलेंस में उनके पार्थिव शरीर को रखा गया। इस दौरान 'अमर रहे' के नारों के बीच उन्हें पंजाब के मानसा स्थित खालसा आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके शरीर का उपयोग अब भावी डॉक्टरों के प्रशिक्षण और वैज्ञानिक शोध के लिए किया जाएगा।
अंधविश्वास को पीछे छोड़ मानवता की मिसाल
ग्रामीण परिवेश में अक्सर देहदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और संकोच देखे जाते हैं, लेकिन खानपुर कोलियां में रघुबीर इन्सां के परिवार ने इन सबको पीछे छोड़ दिया। इलाके के गणमान्य लोगों ने परिवार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से ही चिकित्सा विज्ञान को नई ऊंचाइयां मिलती हैं। देहदान की यह प्रक्रिया न केवल चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगी, बल्कि समाज में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता भी पैदा करेगी।