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पिहोवा धान घोटाला: राइस मिलर के बाद अब रडार पर आए AFSO और इंस्पेक्टर, विभागीय रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Apr 04, 2026 12:28 PM

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के पिहोवा में धान की किल्लत का यह मामला अब महज एक मिलर की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक (DFSC) नरेश कुमार द्वारा तैयार की गई 16 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने विभाग के भीतर चल रहे खेल की परतें खोल दी हैं।

रिपोर्ट में साफ तौर पर जिक्र है कि इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा और एएफएसओ जसबीर सिंह की राइस मिलर के साथ कथित मिलीभगत रही, जिसके चलते इतना बड़ा स्टॉक गायब हो गया और विभाग को भनक तक नहीं लगी। 30 मार्च 2026 को जारी पत्र संख्या 7060 के जरिए महानिदेशक और एसीएस स्तर के अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की अनुशंसा भेजी गई है।

किसान संगठनों ने खोला मोर्चा, उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस मामले को लेकर किसान राजनीति भी गरमा गई है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के कद्दावर नेता प्रिंस वड़ैच ने इस पूरे प्रकरण को एक 'संगठित सिंडिकेट' का नतीजा बताया है। वड़ैच का कहना है कि यह केवल एक मिल का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी धान की हेराफेरी कर जनता के पैसे पर डाका डाला गया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर संबंधित अधिकारियों और मिलर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरने से गुरेज नहीं करेंगे।

विभाग में सफाई अभियान की तैयारी?

धान घोटाले की गूंज चंडीगढ़ तक पहुंचने के बाद अब खाद्य एवं नागरिक उपभोक्ता मामले विभाग में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। सूत्रों की मानें तो मुख्यालय ने इस रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से लिया है और जल्द ही संबंधित कर्मचारियों को निलंबित करने की तैयारी है। फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान जब स्टॉक रजिस्टर और मौके पर मौजूद धान के कट्टों का मिलान किया गया, तो आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर मिला। अब जांच इस बिंदु पर टिकी है कि गायब किया गया धान बाजार में कहां खपाया गया और इस काली कमाई में किन-किन सफेदपोशों की हिस्सेदारी रही।

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