Haryana Ration Depot Rules: अब बिना सही तौल के नहीं कटेगी राशन की पर्ची, जानें सरकार का नया डिजिटल फॉर्मूला
May 20, 2026 5:13 PM
हरियाणा। गरीबों के निवाले पर डाका डालने और राशन वितरण में हेराफेरी करने वाले डिपो संचालकों पर नकेल कसने के लिए गुरुग्राम प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और आधुनिक रास्ता अख्तियार किया है। गुरुग्राम के राशन डिपो अब पुरानी पारंपरिक व्यवस्था को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल होने जा रहे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिले में नई जेनरेशन की पीओएस (POS) मशीनें और इलेक्ट्रॉनिक कांटे (डिजिटल वेट मशीन) उपलब्ध कराने की मुहिम शुरू कर दी है। सरकार की इस पहल का सीधा मकसद डिपो स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार, कम राशन देने की आदतों और अनाज की कालाबाजारी पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगाना है।
उपभोक्ताओं की पुरानी समस्या का अंत: अब पर्ची और तौल में नहीं होगा अंतर
दरअसल, लंबे समय से कार्डधारकों की यह आम शिकायत रहती थी कि डिपो संचालक ऑनलाइन मशीन (POS) पर अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड में तो पूरा राशन चढ़ा देते हैं, लेकिन जब भौतिक रूप से अनाज तौलने की बात आती है, तो चालाकी से वजन कम कर दिया जाता है। इस 'डंडी मारो' खेल को खत्म करने के लिए ही विभाग यह नई तकनीक लेकर आया है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम: अब डिजिटल वेट मशीन को सीधे पीओएस मशीन के सॉफ्टवेयर से इंटीग्रेट (जोड़) कर दिया गया है। जब तक इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर राशन की सटीक मात्रा (वजन) नहीं आएगी, तब तक पीओएस मशीन आगे की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करेगी और न ही उपभोक्ता की पर्ची जनरेट होगी। यानी जितना अनाज मशीन के रिकॉर्ड में दर्ज होगा, कांटा भी उतना ही वजन दिखाएगा।
गुरुग्राम, सोहना और बादशाहपुर में मशीनें वितरित; जल्द शुरू होगी ट्रेनिंग
परियोजना के पहले चरण के तहत जिले के विभिन्न ब्लॉकों में इन मशीनों का वितरण तेजी से किया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक अकेले गुरुग्राम क्षेत्र में 86 नई हाईटेक पीओएस और वेट मशीनें डिपो धारकों को सौंपी जा चुकी हैं। इसके अलावा सोहना ब्लॉक में 51 और बादशाहपुर क्षेत्र में 13 मशीनों का सेटअप दिया गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटौदी और फर्रुखनगर के ग्रामीण व शहरी डिपो को भी आगामी कुछ दिनों में इस सिस्टम से लैस कर दिया जाएगा।
इन नई मशीनों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभाग के सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (ASFO) सुनील कुमार की अगुवाई में एक विशेष ट्रेनिंग सत्र आयोजित किया जा रहा है, ताकि कम पढ़े-लिखे डिपो संचालक भी इस डिजिटल व्यवस्था को आसानी से समझ सकें।
रियल-टाइम डेटा से आसान होगी मॉनिटरिंग, बिचौलियों का खेल खत्म
इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मुख्यालय को चंडीगढ़ और गुरुग्राम बैठे-बैठे ही 'रियल-टाइम डेटा' मिलता रहेगा। अधिकारियों को एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि किस डिपो से किस समय, किस कार्डधारक को कितना राशन बांटा गया है और गोदाम में कितना स्टॉक बाकी है। डिजिटल ऑडिट की इस व्यवस्था से न केवल स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता आएगी, बल्कि भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई करना भी आसान हो जाएगा।