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धूल की तरह रुख बदलने वाले मतलबी लोगों से क्यों रहना चाहिए सावधान, जानिए जीवन का ये बड़ा मंत्र

Jun 18, 2026 10:10 AM

Today Suvichar:  बदलते दौर के साथ इंसानी व्यवहार में भी बड़ा बदलाव आया है। आज का सुविचार समाज के इसी स्याह पहलू को उजागर करता है कि मतलबी लोग और धूल एक जैसे होते हैं—जिधर की हवा चलती है, ये उधर ही चल पड़ते हैं। अमूमन देखा जाता है कि जब तक किसी व्यक्ति से किसी का स्वार्थ सधता है, तब तक रिश्तों में बड़ी मिठास रहती है। लेकिन जैसे ही वक्त का पहिया घूमता है या सामने वाले की उपयोगिता खत्म होती है, लोग गिरगिट की तरह रंग बदलने में देर नहीं लगाते। यह विचार सीधे तौर पर आगाह करता है कि ऐसे लोग कभी सिद्धांतों या भावनाओं के प्रति वफादार नहीं हो सकते।

धूल की तरह बेदिशा होता है स्वार्थी लोगों का व्यवहार

वैज्ञानिक रूप से देखें तो धूल का अपना कोई वजूद या निश्चित दिशा नहीं होती; उसे जिधर का झोंका मिलता है, वह उधर ही बिखर जाती है। ठीक यही बात मतलबी इंसानों पर भी लागू होती है। जब तक उन्हें किसी से लाभ, शक्ति या सुख-सुविधा मिलती रहती है, वे उसके सबसे बड़े शुभचिंतक बने फिरते हैं। मगर जैसे ही संकट के बादल छाते हैं, वे अपना रास्ता बदल लेते हैं। पत्रकारिता और सामाजिक अनुभवों के तराजू पर तौलें तो ऐसे लोग संकट के समय सबसे पहले साथ छोड़ते हैं, जिससे कई बार सीधे और सच्चे लोग गहरे सदमे में चले जाते हैं।

भीड़ बहुत है, लेकिन साथ निभाने वाले 'सारथी' की पहचान जरूरी

यह सुविचार हमें केवल कड़वा सच ही नहीं दिखाता, बल्कि जीवन को समझदारी से जीने का एक बड़ा सबक भी देता है। अक्सर लोग हर हाथ मिलाने वाले को अपना दोस्त या हितैषी मान बैठते हैं। लेकिन अनुभवी आंखें जानती हैं कि साथ चलने वाले हर शख्स को 'साथी' नहीं कहा जा सकता। आज के इस दौर में सबसे बड़ी चुनौती ऐसे लोगों को पहचानने की है जो परिस्थितियों को देखकर नहीं, बल्कि अपने नैतिक मूल्यों और रिश्तों की गरिमा के आधार पर आपका साथ निभाएं। संकट के समय ही ऐसे स्वार्थी तत्वों के चेहरे से नकाब उतरता है।

आंधियों में जो टिके रहे, वही इतिहास रचते हैं

दुनिया में जहां एक तरफ हवा का रुख देखकर चलने वाले लोग हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे विरले लोग भी मौजूद हैं जो बड़े से बड़े तूफान में भी अपने उसूलों और संबंधों से समझौता नहीं करते। यह विचार हमें समाज से निराश होने की बजाय खुद को वैचारिक रूप से मजबूत करने की सीख देता है। आखिरकार, हवा के झोंकों के साथ उड़ने वाली धूल कुछ समय के लिए भले ही आसमान छू ले, लेकिन उसकी कोई साख नहीं होती। दूर तक का सफर वही तय कर पाते हैं, जो आंधियों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी अपने चरित्र की दृढ़ता और रिश्तों की कड़ाही को बचाए रखते हैं।

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