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₹590 करोड़ का बैंक घोटाला: चंडीगढ़ और पंचकूला में CBI की बड़ी रेड, खंगाले जा रहे लॉकर

May 16, 2026 9:55 AM

पंचकूला। हरियाणा के सबसे चर्चित और बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक, आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ₹590 करोड़ के इस वित्तीय महाघोटाले को लेकर सीबीआई की टीमों ने चंडीगढ़ और पंचकूला में एक साथ 7 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। 14 मई की शाम को शुरू हुई इस छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने आरोपियों के आलीशान आवासों, नामी ज्वेलर्स के शोरूम, संदिग्ध कंपनियों के दफ्तरों और बैंक लॉकर्स की बारीकी से तलाशी ली। एजेंसी को इन ठिकानों से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, बेनामी संपत्तियों के रिकॉर्ड और वित्तीय हेरफेर से जुड़े दस्तावेज हाथ लगे हैं।

सरकारी महकमों से जुड़ा है खेल, 5 आईएएस अधिकारियों पर गिरेगी गाज

यह पूरा मामला सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें हरियाणा के कई रसूखदार सरकारी विभागों से जुड़ी हैं। जांच में सामने आया है कि पंचायत विभाग, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली निगम और पंचकूला नगर निगम के सरकारी पैसों को अवैध तरीके से निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पहले ही कड़ा रुख अपना रखा था। उन्हीं के निर्देश पर पहले एसीबी और फिर सीबीआई को यह केस सौंपा गया। अब सरकार ने हरियाणा के 5 सीनियर आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिसके बाद चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप है।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और फाइल मूवमेंट से खुलेगा राज

सीबीआई के हाथ लगे कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेजों, फाइल मूवमेंट के रिकॉर्ड और संदिग्ध ऑडियो क्लिप्स से कई बड़े चेहरों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। इन डिजिटल रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर इस बात की चर्चा है कि कैसे सरकारी फंड को बैंक खातों में घुमाना है और कानूनी कार्रवाई से कैसे बचना है। जांच एजेंसी इन सभी ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है। अब तक इस पूरे नेक्सस से जुड़े 16 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और आईएएस अधिकारियों से होने वाली आमने-सामने की पूछताछ के बाद कुछ और बड़े मगरमच्छ जाल में फंस सकते हैं।

ये हैं इस महाघोटाले के मुख्य किरदार और उनकी मोडस ऑपरेंडी

इस ₹590 करोड़ के घोटाले की स्क्रिप्ट लिखने का मुख्य आरोपी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (सेक्टर-32, चंडीगढ़) का पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि है, जिसने बाद में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक जॉइन कर लिया था। रिभव ने बैंकिंग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर फर्जी शेल कंपनियों के नाम पर खाते खोले और सरकारी खजाने की रकम को वहां डायवर्ट कर दिया। इस खेल में उसका साथ दिया बैंक के पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय ने, जिसने अगस्त 2025 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इन दोनों ने मिलकर जाली चेक और फर्जी पेमेंट इंस्ट्रक्शंस के जरिए करोड़ों की हेराफेरी की। इस काले धन की एक बड़ी हिस्सेदारी अभय की पत्नी स्वाति सिंगला की कंपनी 'स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स' में ट्रांसफर की गई, जिसमें स्वाति की 75 फीसदी की हिस्सेदारी है।

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