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हरियाणा खनन घोटाला: भारी जुर्माने को आधा करने वाले इंजीनियर पर गिरा विजिलेंस का हंटर

Mar 20, 2026 1:53 PM

पंचकूला। हरियाणा के खनन विभाग में मची लूट और भ्रष्टाचार की परतों को विजिलेंस ने एक बार फिर उधेड़ कर रख दिया है। विजिलेंस की रेवाड़ी और नारनौल यूनिट ने एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत खनन इंजीनियर संजय सिम्बरवाल को बुधवार देर रात पंचकूला से दबोच लिया। बृहस्पतिवार को उन्हें नारनौल लाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। यह पूरा मामला साल 2020 के दौरान नारनौल में हुए उस अवैध खनन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें अधिकारियों ने वाहन मालिकों के साथ मिलकर सरकार के राजस्व की 'सुपारी' दे दी थी।

एनजीटी के आदेशों की धज्जियां, कागजों में 'कीमत' का खेल

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के सख्त आदेश हैं कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना (Environmental Compensation) लगाया जाए। नियम के मुताबिक, अगर गाड़ी की कीमत 25 लाख से ज्यादा है, तो जुर्माना 4 लाख रुपये तय है। भ्रष्टाचार का असली खेल यहीं से शुरू हुआ। आरोप है कि माइनिंग इंजीनियर संजय सिम्बरवाल और उनके साथियों ने वाहन मालिकों से साठगांठ की और फर्जी शपथपत्र तैयार करवाए। जिन गाड़ियों की वास्तविक कीमत 30 से 40 लाख रुपये थी, उन्हें दस्तावेजों में 25 लाख से कम का दिखा दिया गया, जिससे 4 लाख का जुर्माना सीधे घटकर 2 लाख या उससे भी कम रह गया।

292 वाहनों का रिकॉर्ड खंगाला, 43 मामलों में धांधली की पुष्टि

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने कुल 292 जब्त वाहनों के दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की। इनमें से 43 मामलों में स्पष्ट रूप से जालसाजी और फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। इन 43 मामलों में बिना आरटीए (RTA) सत्यापन के ही गलत कीमतों वाले दस्तावेज स्वीकार कर लिए गए। प्रारंभिक आंकलन के अनुसार, इस हेराफेरी से सरकार को करीब 21 लाख रुपये की सीधी वित्तीय हानि हुई है, हालांकि विजिलेंस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह आंकड़ा करोड़ों में पहुंच सकता है।

फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज

एसीबी के इंस्पेक्टर अशोक कुमार के नेतृत्व में चल रही इस जांच में अब तक कुल 17 आरोपियों की पहचान हुई है, जिनमें से 15 को गिरफ्तार किया जा चुका है। सिम्बरवाल की गिरफ्तारी के बाद अब विभाग के तत्कालीन माइनिंग ऑफिसर (MO) राजेंद्र प्रसाद और क्लर्क चंद्रशेखर फरार चल रहे हैं। विजिलेंस की टीमें इन दोनों की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471, 120-बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़े मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

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