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पंचकूला नगर निगम घोटाला: पूर्व अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक गिरफ्तार, IAS अधिकारियों के जाली साइन कर लूटे करोड़ों

Apr 03, 2026 10:44 AM

पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले हाई-प्रोफाइल कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अपनी जांच तेज कर दी है। वीरवार को ब्यूरो ने नगर निगम पंचकूला के तत्कालीन सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को गिरफ्तार किया। विकास पर आरोप है कि उसने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी साजिश रची, जिससे निगम के करोड़ों रुपये निजी हाथों में चले गए। इस मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है, जिसने निगम और बैंक प्रबंधन के बीच चल रहे काले खेल की परतें खोल दी हैं।

जाली मोहरें और फर्जी हस्ताक्षर: ऐसे रची गई साजिश

ACB की तफ्तीश में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी विकास कौशिक जब नगर निगम में सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात था, तभी उसने कोटक महिंद्रा बैंक (सेक्टर-11) के तत्कालीन मैनेजर पुष्पेंद्र के साथ मिलकर मई 2020 में एक फर्जी बैंक खाता खुलवाया। इस खाते के फार्म पर तत्कालीन कमिश्नर सुमिधा कटारिया (IAS) और सीनियर अकाउंट ऑफिसर की जाली मोहरें लगाई गई थीं। यहीं नहीं, आरोपी ने उच्चाधिकारियों के जाली हस्ताक्षर भी किए ताकि बैंक रिकॉर्ड में सब कुछ असली नजर आए। जून 2022 में इसी तर्ज पर एक और फर्जी खाता खोला गया, जिसमें तत्कालीन DMC दीपक सूरा के फर्जी साइन किए गए थे।

एफडी तुड़वाकर बिल्डरों को भेजा सरकारी पैसा

घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। विकास और पुष्पेंद्र मिलकर निगम की असली एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) को मैच्योरिटी से पहले ही तुड़वा देते थे। इसके बाद आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) के जरिए उस राशि को पहले निगम के नाम से खुले फर्जी खातों में डाला जाता और फिर वहां से रजत ढाहरा और स्वाति तोमर जैसे व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। जांच में पता चला है कि अंततः यह मोटी रकम कई बिल्डरों को भेजी गई। सरकारी ऑडिट और बैंक रिकॉर्ड के बीच इस हेराफेरी को लंबे समय तक दबा कर रखा गया।

2026 में हुआ खुलासा: जब खाली मिले निगम के खाते

इस महाघोटाले की भनक तब लगी जब फरवरी 2026 में नगर निगम ने अपनी जमा राशि और एफडी के बारे में बैंक से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। चूंकि सारी एफडी पहले ही गुपचुप तरीके से तुड़वाई जा चुकी थीं, इसलिए खातों में राशि शून्य थी। स्थिति बिगड़ती देख कोटक महिंद्रा बैंक के आरएम दलीप राघव ने विकास कौशिक से संपर्क किया, क्योंकि बैंक के पास निगम के सवालों का कोई जवाब नहीं था। ACB अब इस मामले में अन्य संलिप्त अधिकारियों और उन बिल्डरों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्हें सरकारी पैसे का फायदा पहुंचाया गया।

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