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Panchkula News: मुख्यमंत्री नायब सिंह ने पंचकूला में तीन दिवसीय 38वें वसंत उत्सव का किया शुभारंभ

Mar 13, 2026 4:03 PM

पंचकूला: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार सेक्टर-5 स्थित टाउन पार्क में तीन दिवसीय 38वें वसंत उत्सव का शुभारंभ किया। 37 वर्षों में पहली बार इस उत्सव का आयोजन सूरजकुंड मेले की तर्ज पर किया जा रहा है। इसके साथ ही, रखरखाव के लिए साल भर से बंद एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन भी जनता के लिए खोला गया है।इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कार्यक्रम में पंहुचने पर परंपरागत पगड़ी बांध कर व ढोल नगाड़ो और वाद्ययंत्रों से स्वागत किया गया। 

मुख्यमंत्री ने वसंत उत्सव में फूलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कट फ्लावर, ड्राई फ्लावर और फ्रेस फ्लावर सैक्शन में फूलों की विभिन्न किस्मों में गहरी रूचि दिखाई। उन्होंने स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों के स्टॉलों का भी अवलोकन किया। कार्यक्रम को मुख्यतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वसंत उत्सव हमारी संस्कृति, प्रकृति प्रेम व सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव है। यह उत्सव पूरे प्रदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंचकूला हरियाणा का एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर है। यह नगर प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और सुव्यवस्थित विकास का अद्भुत उदाहरण है। 


                


यहां आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम दिखाई देता है और आज के इस आयोजन ने इस शहर की सुंदरता को और भी बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि इस उत्सव को आकर्षक बनाने के लिए पुष्प सज्जा, कट फ्लावर, रंगोली प्रतियोगिता, चित्रकला, पॉट पेंटिंग, फेस पेंटिंग और टैटू प्रतियोगिता, पर्यावरण क्विज, मेहंदी प्रतियोगिता एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इन सभी प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को भी बधाई दी और कहा कि इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से न केवल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा बल्कि बच्चों और युवाओं में रचनात्मकता भी विकसित होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का ऐसा देश है, जहां प्रकृति ने हमें अनेक ऋतुओं का वरदान दिया है। 

हर ऋतु अपने साथ एक नई अनुभूति और नई ऊर्जा लेकर आती है। हमारे देश की संस्कृति भी ऋतुओं के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए हर ऋतु के आगमन पर कोई न कोई पर्व या उत्सव मनाया जाता है। वसंत उत्सव हमें जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देता है। यह उत्सव हमें सिखाता है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और सकारात्मक परिवर्तन ही प्रगति की ओर ले जाता है।

पर्यावरण से जुड़े विषयों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल प्रकृति के संरक्षण से ही संभव है। हरियाणा सरकार भी पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं। 

पेड़ों के संरक्षण के लिए प्राणवायु देवता पेंशन योजना के तहत 75 साल से ऊपर के पेड़ों के रखरखाव के लिए 3 हजार रुपये सालाना पेंशन देने का प्रावधान किया हुआ है। अब तक 3,819 पेड़ों की पहचान करके उनके अभिरक्षकों को 2 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि पेंशन के रूप में दी गई है। इनके अलावा 1,541 अतिरिक्त पेड़ों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश में ’ऑक्सीवन’ विकसित करने की पहल भी शुरू की है। अब तक प्रदेश में 20 ऑक्सीवन स्थापित किए गये हैं। इसके तहत 5 से 100 एकड़ भूमि पर पेड़ लगाए जाते हैं। 

पंचकूला के बीड़ घग्गर तथा करनाल में पुरानी बादशाही नहर पर ऑक्सीवन का कार्य प्रगति पर है। इसमें अनेक दुर्लभ और औषधीय गुणों वाले पेड़ लगाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण को पर्यटन और विकास से भी जोड़ रही है। इसी दिशा में गुरुग्राम के अरावली क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी जंगल सफारी विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। यह परियोजना न केवल वन्य जीवों के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में शामिल किए गए अनेक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वृक्ष आवरण बढ़ाने और प्लाईवुड उद्योगों को और समर्थन देने के लिए हरियाणा राज्य एग्रो फोरेस्ट्री पॉलिसी लागू की जाएगी। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत पंचायत भूमि और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधा रोपण अभियान चलाया जाएगा और पवित्र उपवन संरक्षण के लिए सभी पवित्र उपवन को अधिसूचित किया जाएगा। 

इसके अलावा गांव हसनपुर, करनाल में वन विभाग की 100 एकड़ भूमि में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से एक डियर पार्क बनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लोगों से आह्वान किया कि सब मिलकर इस उत्सव को जीवन के एक नए  दृष्टिकोण के रूप में अपनाएं और यह संकल्प लें कि हम अपने पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंचकूला का यह वसंत उत्सव आने वाले वर्षों में और अधिक भव्य रूप लेगा और पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

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