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पानीपत में फर्जीवाड़ा: पार्षद के जाली साइन से बन रहे थे सरकारी कागज, 4 CSC संचालकों पर केस

May 09, 2026 10:35 AM

पानीपत। पानीपत के सियासी और प्रशासनिक हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वार्ड-6 की भाजपा पार्षद कोमल पांचाल ने खुद के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े को उजागर किया। शहर के नूरवाला और तहसील कैंप इलाके में सक्रिय कुछ कंप्यूटर सेंटर (CSC) संचालक पार्षद की फर्जी मोहर और जाली हस्ताक्षरों के दम पर धड़ल्ले से सरकारी कागजात तैयार कर रहे थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के आदेश पर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

कैसे खुली सिस्टम में सेंध लगाने वालों की पोल?

यह पूरा मामला 13 मार्च को तब सामने आया जब नूरवाला स्थित एक कंप्यूटर सेंटर का संचालक पार्षद कोमल पांचाल के पास कुछ फाइलें लेकर पहुंचा। ये फाइलें हरियाणा निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) बनवाने से संबंधित थीं। पार्षद ने जैसे ही कागजात पलटे, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फाइलों पर कोमल पांचाल के नाम की मोहर और उनके हस्ताक्षर पहले से ही मौजूद थे, जबकि उन्होंने किसी भी फाइल पर साइन नहीं किए थे। पार्षद की सतर्कता ने एक ऐसे रैकेट को बेनकाब कर दिया जो सीधे सरकारी पोर्टल में फर्जी एंट्री करवा रहा था।

सीएससी संचालकों का संगठित नेटवर्क

पार्षद ने अपनी शिकायत में इस गिरोह के काम करने के तरीके का भी खुलासा किया है। आरोप है कि सतपाल नाम का एक व्यक्ति सीधे जनता से संपर्क करता है और उन्हें कमलजीत कौर, सौरव और शर्मा जैसे सीएससी संचालकों के पास ले जाता है। ये संचालक मिलीभगत कर पार्षद के फर्जी साइन करते हैं और बिना किसी वेरिफिकेशन के दस्तावेजों को सरकारी पोर्टल पर फॉरवर्ड कर देते हैं। पार्षद का कहना है कि यह न केवल उनके पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने जैसा गंभीर अपराध है।

पिछली फाइलों और डेटा की जांच पर टिकी पुलिस की नजर

पार्षद कोमल पांचाल ने आशंका जताई है कि यह गिरोह केवल कुछ फाइलों तक सीमित नहीं है। पिछले काफी समय से ये लोग सक्रिय हैं और संभव है कि सैंकड़ों लोगों के फर्जी डोमिसाइल, आधार कार्ड या अन्य संबंधित कागजात इन्हीं जाली हस्ताक्षरों के सहारे बनवा दिए गए हों। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि पोर्टल पर पिछले रिकॉर्ड्स में पार्षद के नाम से कितनी फाइलें अप्रूव की गई हैं। पुलिस ने आरोपियों के कंप्यूटर और रिकॉर्ड को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गोरखधंधे की जड़ें कितनी गहरी हैं।

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