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पंजाब विधानसभा में बजट बहस के दौरान बाजवा ने सरकार से मांगा महिलाओं के 48 हजार का जवाब, बोले- 48 हजार मिलेंगे या कुर्ता झाड़ लें

Mar 09, 2026 12:20 PM

बजट सत्र का तीसरा दिन: पंजाब विधानसभा में बजट सत्र के तीसरे दिन बजट पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरम रहा। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार की नीतियों और वादों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से महिलाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता, अवैध खनन से संभावित आय, बेअदबी के मामलों और राज्य की कानून-व्यवस्था पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। इस दौरान सदन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कई बार स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा।


महिलाओं की सहायता राशि पर उठाए सवाल

बाजवा ने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए देने का वादा किया गया था। उनके अनुसार पांच साल में यह राशि 60 हजार रुपए बनती है, लेकिन अब तक महिलाओं को केवल 9 हजार रुपए ही दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी बजट स्पीच में स्पष्ट करना चाहिए कि क्या महिलाओं को चार साल के 48 हजार रुपए मिलेंगे या नहीं। बाजवा ने आरोप लगाया कि पंजीकरण प्रक्रिया में ही तीन महीने का समय लग गया, जिससे योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई।


माइनिंग और राजस्व पर सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव से पहले कहा गया था कि पंजाब में भ्रष्टाचार और मिसमैनेजमेंट खत्म कर राजस्व बढ़ाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य की नदियों से माइनिंग के जरिए हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आय की संभावना बताई गई थी। बाजवा ने सवाल किया कि बजट में इस संभावित आय का कोई स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन को रोकने के लिए भी सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए हैं।


बेअदबी मामलों पर कार्रवाई की मांग

बाजवा ने सदन में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चार साल बीत जाने के बावजूद दोषियों को सख्त सजा नहीं मिल सकी। उनके मुताबिक पहले भी इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन छह महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों को जल्द अदालत के कटघरे में लाया जाए और कड़ी सजा दी जाए।


मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच नोकझोंक

बजट चर्चा के दौरान बाजवा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच तीखी बहस भी हुई। मुख्यमंत्री ने पूछा कि बाजवा बजट पर बोल रहे हैं या राज्यपाल के अभिभाषण पर। इस पर बाजवा नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा तो फिर उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया जाए। मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि जब पहले बाहर जाते थे तो क्या उनसे अनुमति लेकर जाते थे। इस पर सदन में कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।


कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर चिंता

बाजवा ने कहा कि राज्य में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि कई लोगों को फिरौती की चिट्ठियां मिल रही हैं और विधायकों के पास भी हथियार लाइसेंस की सिफारिशें आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक सांसद ने खुद अवैध माइनिंग में कुछ अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाया है। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने अमृतसर में एक पुलिसकर्मी के बेटे की मौत का उदाहरण दिया।


मेडिकल कॉलेज और विकास योजनाओं पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मेडिकल कॉलेजों की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2022-23 में 14 मेडिकल कॉलेज बनाने की बात कही गई थी। अगले साल होशियारपुर और कपूरथला में कॉलेज की मंजूरी का ऐलान किया गया, लेकिन उनकी प्रगति की कोई जानकारी नहीं दी गई। बाद में फिर नई घोषणाएं की गईं। बाजवा ने कहा कि पहले घोषित परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट की जाए।


कांग्रेस और AAP विधायकों के बीच हंगामा

बजट बहस के दौरान कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विधायक आमने-सामने आ गए। मंत्री अमन अरोड़ा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस के विधायक पहले भी वॉकआउट कर चुके हैं और अब चर्चा से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में थोड़ी भी जिम्मेदारी है तो उन्हें बैठकर सरकार की बात सुननी चाहिए। कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा जारी रहा।


सरकार ने अपने काम गिनाए

मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने वादों को पूरा किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने घर-घर नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन एक भी नौकरी नहीं दी। इसके विपरीत वर्तमान सरकार ने अब तक 63 हजार नौकरियां देने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं को मिलने वाली सहायता का पैसा भी नहीं दे सकी।


शिक्षकों के लिए मुआवजा और अन्य योजनाएं

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह ने सदन में बताया कि ब्लॉक समिति चुनाव के दौरान सड़क हादसों में जान गंवाने वाले दो शिक्षकों के परिवारों को विभाग की ओर से सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री की ओर से पहले ही 10-10 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क हादसों में जान गंवाने वाले शिक्षकों के लिए लगभग 1 करोड़ रुपए की सहायता देने की रणनीति पर काम कर रही है।


सतलुज नदी के किनारों पर बांध ऊंचे होंगे

जगराओं क्षेत्र से जुड़े सवाल के जवाब में मंत्री वरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि सतलुज नदी के दोनों किनारों पर बने बांधों को लगभग दो फुट और ऊंचा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पानी से बचाव के लिए इलाके में कई परियोजनाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। साथ ही नहरों, पुलों और खालों से जुड़े विकास कार्य भी किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में बाढ़ की स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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