पंजाब में गर्मी का टॉर्चर: बठिंडा में पारा 40 के पार, जानें कब मिलेगी आंधी-बारिश से राहत?
May 10, 2026 10:04 AM
पंजाब। पंजाब में सूरज के कड़े तेवरों ने मई की शुरुआत में ही लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है। शनिवार को राज्य के औसत तापमान में 1.6 डिग्री की उछाल देखी गई, जिससे कई शहरों में पारा सामान्य से ऊपर चला गया। मालवा बेल्ट का बठिंडा शहर 39.1 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म इलाका रहा। वहीं फाजिल्का में 37 और फिरोजपुर में 36.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। गर्मी का आलम यह रहा कि दोपहर के वक्त बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है, लेकिन मौसम विज्ञानियों की मानें तो यह उमस भरी गर्मी ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस लाएगा राहत: 11 मई से बदलेगी हवा की चाल
मौसम केंद्र चंडीगढ़ के मुताबिक, उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है, जिसका सीधा असर पंजाब की आबो-हवा पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 11 मई की सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। राजस्थान की सीमा से सटे जिलों और माझा बेल्ट में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। यह बदलाव केवल हवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गरज-चमक के साथ होने वाली हल्की बारिश तापमान में बड़ी गिरावट ला सकती है।
तीन दिनों का जिलावार अलर्ट: कहां क्या रहेगा असर
मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों के लिए यलो अलर्ट जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट की है। 11 मई को पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन और बठिंडा जैसे सरहदी इलाकों में तेज आंधी का असर रहेगा। 12 मई को मोगा, कपूरथला और संगरूर के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं। वहीं 13 मई को जालंधर, लुधियाना और पटियाला समेत दोआबा और पुआध के इलाकों में मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है। इस दौरान उमस तो बढ़ेगी, लेकिन दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री की कमी आने से लोगों को राहत मिलेगी।
किसानों और बागवानों के लिए विशेष एडवाइजरी
खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सचेत किया है। इस समय पंजाब में मूंग की फसल और सब्जियों की खेती जोरों पर है। तेज हवाओं के कारण फलों के गिरने का खतरा बना रहता है, इसलिए बागवानों को सिंचाई का प्रबंधन सही रखने को कहा गया है। विभाग ने आम जनता को भी सलाह दी है कि आंधी के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, क्योंकि 50 किमी की रफ्तार वाली हवाएं कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।