डबवाली में बस कंडक्टर की गुंडागर्दी: पास दिखाने पर छात्रों को बीच रास्ते उतारा, वीडियो वायरल
Apr 30, 2026 3:31 PM
सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले में प्राइवेट बस चालकों और परिचालकों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि वे अब सरकारी नियमों को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं। ताजा मामला डबवाली-गोरीवाला रूट का है, जहाँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों के साथ बस कंडक्टर द्वारा बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। छात्रों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने सरकार द्वारा जारी वैध 'बस पास' दिखाकर सफर करना चाहा, लेकिन कंडक्टर ने दो टूक कह दिया— 'पैसे दो या बस से नीचे उतरो।
"जो करना है कर लो"— कंडक्टर की खुली चुनौती
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कंडक्टर छात्रों पर दबाव बना रहा है। जब छात्रों ने तर्क दिया कि नियमों के मुताबिक उनके पास प्राइवेट बसों में भी मान्य हैं, तो कंडक्टर ने आव देखा न ताव और ड्राइवर को बस बीच सड़क पर ही रोकने का इशारा कर दिया। तल्ख लहजे में कंडक्टर ने कहा, "पैसे देकर टिकट लो, फिर उस टिकट को लेकर चाहे जहाँ मर्जी शिकायत कर देना, हमें फर्क नहीं पड़ता।" इस दौरान कई छात्रों को जबरन बस से नीचे उतार दिया गया, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुराना है विवाद, बेलगाम हैं ऑपरेटर
हैरानी की बात यह है कि डबवाली-ऐलनाबाद और डबवाली-गोरीवाला रूट पर इस तरह की गुंडागर्दी कोई नई बात नहीं है। महज 24 घंटे पहले भी इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था। सरकार ने छात्रों की सुविधा के लिए प्राइवेट बसों में पास की अनुमति दे रखी है, लेकिन धरातल पर निजी बस ऑपरेटर इन नियमों को अपनी सुविधानुसार मरोड़ रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्राइवेट बस कर्मी जानबूझकर उन्हें बस में चढ़ने नहीं देते और अगर चढ़ जाएं, तो अपमानित कर उतार दिया जाता है।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों में खासा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते इन बेलगाम ऑपरेटरों पर नकेल नहीं कसी, तो कभी भी कोई बड़ा टकराव हो सकता है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिया गया और रूट पर बसों का सुचारू संचालन सुनिश्चित नहीं हुआ, तो वे चक्का जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल, विभाग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बार-बार वीडियो सामने आने के बावजूद इन ऑपरेटरों के लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किए जा रहे।