Savita Punia Hockey: एशियन गेम्स पर है सविता पूनिया की नजर, जानिए न्यूजीलैंड दौरे और एशियन गेम्स की पूरी तैयारी
Jun 13, 2026 3:41 PM
सिरसा। भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे भरोसेमंद और अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया एक बार फिर विरोधी टीम के हमलों को नाकाम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की धरती पर 15 जून से शुरू हो रहे महिला नेशंस कप में सविता पूनिया भारतीय डिफेंस की कमान संभालती नजर आएंगी। इस हाई-वोल्टेज टूर्नामेंट में भारतीय टीम को करीब 5 से 6 कड़े मुकाबले खेलने हैं। सविता के पिता महेंद्र सिंह ने गर्व से बताया कि भारतीय टीम इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार होकर न्यूजीलैंड की सरजमीं पर कदम रख चुकी है और खिलाड़ियों के हौसले बुलंद हैं। 20 जून को टूर्नामेंट का फाइनल खेला जाना है, जहां भारतीय फैंस को टीम से गोल्ड मेडल की उम्मीद है।
पदक जीत घर लौटेंगी सविता, फिर शुरू होगा एशियन गेम्स का मिशन
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, इस कड़े टूर्नामेंट की समाप्ति के बाद सविता पूनिया 24 या 25 जून तक अपने गृह जिले सिरसा लौट सकती हैं। लंबे समय बाद घर लौटने पर वह कुछ दिन अपने माता-पिता और परिवार के साथ बिताएंगी। हालांकि, इस व्यस्त खेल कैलेंडर के बीच उनके पास आराम करने के लिए बहुत कम वक्त होगा। घर पर छोटी सी छुट्टी बिताने के तुरंत बाद वह आगामी एशियन गेम्स (Asian Games) के मिशन में जुट जाएंगी। इसके लिए भारतीय हॉकी संघ द्वारा बेंगलुरु में विशेष नेशनल कैंप और ट्रायल आयोजित किए जा रहे हैं, जहां सविता अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देंगी।
जोधकां गांव के मैदान से टोक्यो ओलंपिक की 'ग्रेट वॉल' बनने का सफर
11 जून 1990 को सिरसा के छोटे से गांव जोधकां में जन्मीं सविता पूनिया का अंतरराष्ट्रीय हॉकी के शिखर तक पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनके पिता महेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग से बतौर फार्मासिस्ट रिटायर्ड हैं और मां लीलावती एक कुशल गृहिणी हैं। सविता ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर न केवल भारतीय टीम में जगह बनाई, बल्कि 18वें एशियन गेम्स में देश को रजत पदक (Silver Medal) दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी खेल तकनीक का लोहा पूरी दुनिया मानती है, यही वजह है कि उन्हें 'एशिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर' के खिताब से भी नवाजा जा चुका है। टोक्यो ओलंपिक 2020 के दौरान गोलपोस्ट के सामने उनके अद्भुत प्रदर्शन ने देश के करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया था, जिसके बाद खेल जगत ने उन्हें "द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया" की उपाधि दी।
लीग क्रिकेट की तरह हॉकी में भी जमाया सिक्का
मैदान के अंदर और बाहर, सविता हमेशा एक लीडर की भूमिका में रही हैं। यही वजह है कि सिरसा प्रशासन ने उन्हें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी गंभीर सामाजिक मुहिम का ब्रांड एंबेसडर बनाया। हाल ही में संपन्न हुई हॉकी प्री लीग में भी उनका जलवा बरकरार रहा। उन्होंने 'सूरमा' टीम की तरफ से खेलते हुए न सिर्फ अपनी टीम को चैंपियन बनाया, बल्कि एक बार फिर टूर्नामेंट की बेस्ट गोलकीपर का अवॉर्ड अपने नाम किया। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो साल 2021 में सविता का विवाह सोनीपत के रहने वाले अंकित बल्हारा से हुआ, जो वर्तमान में कनाडा में एक नामचीन कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। खेल और परिवार के बीच बेहतरीन संतुलन बनाते हुए सविता आज देश की लाखों उभरती हुई महिला खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।