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तमिलनाडु में विजय की सरकार बनने पर अब भी सस्पेंस: TVK के पास फिलहाल 116 विधायकों का समर्थन, शपथ ग्रहण टला

May 09, 2026 1:58 PM

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में चेन्नई से लेकर पूरे राज्य तक सरकार गठन को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। अभिनेता से नेता बने विजय ने शुक्रवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश किया, लेकिन TVK गठबंधन अब भी बहुमत के आंकड़े से पीछे है। राजभवन सूत्रों के अनुसार विजय केवल 116 विधायकों का समर्थन पत्र ही पेश कर पाए। इसी वजह से शनिवार को प्रस्तावित मुख्यमंत्री पद की शपथ फिलहाल रद्द कर दी गई। तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों का समर्थन जरूरी है।

चेन्नई में बढ़ा सरकार गठन का सियासी तनाव

चेन्नई स्थित लोक भवन में शुक्रवार शाम हुई बैठक के बाद यह साफ हो गया कि TVK अभी भी जरूरी समर्थन जुटाने में संघर्ष कर रही है। TVK के साथ कांग्रेस, CPI और CPI(M) के विधायक जुड़े हुए हैं, लेकिन VCK और IUML ने अभी तक लिखित समर्थन नहीं दिया। राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने विजय से स्पष्ट कहा कि बिना 118 विधायकों के समर्थन के सरकार गठन का न्योता देना संभव नहीं होगा। यही कारण है कि शपथ ग्रहण की तैयारियां अंतिम समय में रोक दी गईं।

शुक्रवार सुबह VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने सार्वजनिक रूप से TVK को समर्थन देने की बात कही थी। इससे चेन्नई की राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि विजय बहुमत का आंकड़ा पार कर लेंगे। हालांकि देर रात तक राज्यपाल को कोई औपचारिक समर्थन पत्र नहीं सौंपा गया। इसी वजह से विजय का दावा अधूरा रह गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि VCK और IUML के औपचारिक समर्थन के बिना TVK के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा।

तमिलनाडु चुनाव परिणाम के बाद कैसे बदला घटनाक्रम

4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में TVK ने 234 में से 108 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। DMK और AIADMK दोनों ही बहुमत से दूर रह गईं। इसके बाद 5 मई से विजय ने सहयोगी दलों के साथ बातचीत शुरू की। कांग्रेस ने सबसे पहले समर्थन का ऐलान किया। 6 मई को TVK विधायक दल की बैठक में विजय को नेता चुना गया और उन्होंने राज्यपाल को शुरुआती समर्थन पत्र सौंपे। लेकिन राज्यपाल ने 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन दिखाने की शर्त रख दी।

तमिलनाडु में इस समय सबसे बड़ी बहस इस बात पर है कि क्या सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए था। कांग्रेस और कुछ सहयोगी दलों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल जरूरत से ज्यादा संख्या साबित करने पर जोर दे रहे हैं। वहीं राजभवन का कहना है कि स्थिर सरकार के लिए बहुमत का दस्तावेजी समर्थन जरूरी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह मामला अब पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया और समर्थन पत्रों पर निर्भर हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सरकार गठन विवाद

सरकार गठन में देरी के बाद TVK से जुड़ी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को सरकार बनाने का अवसर दिया जाए। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि राज्यपाल को विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के लिए निर्देश देना चाहिए। इस घटनाक्रम ने चेन्नई की राजनीति को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर VCK और IUML के अगले कदम तथा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। तमिलनाडु की राजनीति में अगले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर VCK और IUML औपचारिक समर्थन पत्र दे देते हैं तो विजय आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकते हैं। फिलहाल चेन्नई से लेकर पूरे तमिलनाडु तक राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। TVK समर्थक सरकार गठन को लेकर आशान्वित हैं, जबकि विपक्षी दल राज्यपाल के फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि तमिलनाडु को नया मुख्यमंत्री कब मिलेगा।

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