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UPI Cash Fraud: सावधान! अनजान व्यक्ति से यूपीआई पेमेंट लेकर कैश देना पड़ेगा महंगा, फ्रीज हो सकता है बैंक अकाउंट

Jun 14, 2026 4:28 PM

चाय की टपरी हो या कोई बड़ा शॉपिंग मॉल, आजकल एक वाक्य अक्सर सुनने को मिल जाता है— "भाई साहब, मेरे पास कैश नहीं है, मैं आपके नंबर पर यूपीआई कर देता हूँ, आप मुझे नकद दे दीजिए।" आमतौर पर भारतीय समाज में लोग इसे एक छोटी सी मदद समझकर तुरंत तैयार हो जाते हैं। लेकिन ठहरिए! अगर आप भी अगली बार किसी अजनबी के लिए ऐसा करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। साइबर अपराधियों ने आम जनता की इसी मददगार प्रवृत्ति को अपना सबसे नया और अचूक हथियार बना लिया है। देश भर में एक ऐसे स्कैम का खुलासा हुआ है जहां यूपीआई के बदले कैश का यह सीधा दिखने वाला लेन-देन लोगों के हंसते-खेलते जीवन को कानूनी पचड़ों में घसीट रहा है।

कैसे बुना जाता है 'यूपीआई-कैश एक्सचेंज' का यह मायाजाल?

इस ठगी का मॉडस ऑपेरेंडी (काम करने का तरीका) बेहद सीधा और मनोवैज्ञानिक है। कोई सभ्य दिखने वाला व्यक्ति बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या किसी बाजार में आपके पास आएगा। वह खुद को बेहद लाचार या किसी बड़ी मुसीबत में दिखाएगा, जैसे— "मेरा एटीएम कार्ड काम नहीं कर रहा" या "अस्पताल में कैश की तुरंत जरूरत है"। वह भरोसा जीतने के लिए आपके सामने ही आपके फोनपे, गूगलपे या पेटीएम पर पैसे ट्रांसफर कर देगा। आपके खाते में पैसे क्रेडिट होने का मैसेज आते ही आप उसे अपनी जेब से कैश दे देते हैं। आपको लगता है कि इसमें आपका क्या नुकसान हुआ? लेकिन असली खेल यहीं से शुरू होता है।

आपके खाते में आया पैसा सीधा क्राइम सीन से जुड़ा है!

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ठग आपके खाते में जो पैसा भेजते हैं, वह दरअसल 'दागी' होता है। ये अपराधी किसी अन्य व्यक्ति से लॉटरी, टास्क फ्रॉड या लोन ऐप के नाम पर ठगी करते हैं और उस पैसे को सीधे मुख्य सरगना के खाते में भेजने के बजाय आप जैसे किसी आम और निर्दोष नागरिक के खाते में ट्रांसफर कर देते हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'मनी रूटिंग' या 'लेयरिंग' कहा जाता है। इसके जरिए अपराधी अपनी पहचान छुपा लेते हैं और जांच एजेंसियों को भटकाने के लिए एक आम इंसान को बलि का बकरा बना देते हैं।

बिना गलती के अपराधी की कतार में: बैंक अकाउंट फ्रीज और पुलिसिया पूछताछ

जब इस चेन का असली शिकार (जिसके साथ मूल ठगी हुई थी) पुलिस या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो जांच एजेंसियां उस पैसे का पीछा करती हैं। चूंकि वह पैसा आखिरी बार आपके खाते में आया था, इसलिए कानून की नजर में आपका खाता 'संदिग्ध' (Suspect Account) बन जाता है।

नतीजतन, बिना किसी पूर्व सूचना के बैंक सुरक्षा कारणों से आपके खाते को पूरी तरह फ्रीज कर देता है। एक बार खाता फ्रीज होने के बाद आप अपनी गाढ़ी कमाई का एक रुपया भी नहीं निकाल सकते। इसके बाद आपको पुलिस और साइबर सेल के चक्कर काटते हुए यह साबित करना पड़ता है कि आप इस सिंडिकेट का हिस्सा नहीं हैं बल्कि खुद एक मोहरा बने हैं। कई मामलों में तो लोगों को कानूनी कार्रवाई और अदालती चक्करों से भी गुजरना पड़ रहा है।

समझदारी में ही सुरक्षा है: इन बातों का रखें विशेष ख्याल

डिजिटल युग की इस नई आफत से बचने के लिए अनुभवी वित्तीय विश्लेषक और पुलिस विभाग कुछ कड़े कदम उठाने की सलाह देते हैं:

अजनबियों को कहें साफ 'नो': रास्ते में मिलने वाले किसी भी अज्ञात व्यक्ति से यूपीआई के बदले नकद का लेन-देन बिल्कुल न करें। मदद करने की इच्छा अच्छी है, लेकिन कानूनन यह आपको संकट में डाल सकती है।

दुकानदार को ट्रांसफर करने को कहें: यदि कोई व्यक्ति वाकई मुसीबत में दिखता है, तो उसे सीधे किसी नजदीकी दुकानदार या मर्चेंट को यूपीआई करके कैश लेने की सलाह दें। अपने निजी खाते को बीच में न लाएं।

नियमित रूप से चेक करें स्टेटमेंट: अपने बैंक खातों और यूपीआई एप्लिकेशन्स के नोटिफिकेशन को रोजाना चेक करें कि कहीं कोई अज्ञात राशि आपके खाते में तो नहीं आई।

तुरंत उठाएं ये कदम: अगर अनजाने में ऐसा कोई ट्रांजैक्शन हो गया है और आपको फ्रॉड का अंदेशा है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। इसके साथ ही बिना समय गंवाए सरकारी साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। सतर्कता ही इस अदृश्य अपराध से बचने की सबसे मजबूत ढाल है।

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