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उत्तराखंड में पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले: सीएम धामी ने एक क्लिक में ट्रांसफर किए 111 करोड़ रुपये

May 06, 2026 4:25 PM

उत्तराखंड। उत्तराखंड सरकार ने 'अंत्योदय' और सामाजिक सुरक्षा के अपने संकल्प को दोहराते हुए राज्य के लाखों जरूरतमंदों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग की ओर से दी जाने वाली पेंशन की किश्त जारी की। आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए सीएम ने महज एक क्लिक के जरिए 7.56 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के खातों में 111.82 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे हस्तांतरित कर दी।

अंत्योदय के लिए समर्पित सरकार: मुख्यमंत्री का संबोधन

सचिवालय में उपस्थित अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार का मूल मंत्र समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का सशक्तिकरण है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए समर्पित है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।" मुख्यमंत्री ने इस बात पर संतोष जताया कि विभिन्न कैंपों के माध्यम से हर साल 60 हजार से अधिक नए लाभार्थियों को समाज कल्याण की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

व्यवस्था में सुधार और नवाचार पर जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भविष्य के लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि 59 वर्ष की आयु पूरी करने वाले व्यक्तियों का अग्रिम सर्वे किया जाए ताकि 60 वर्ष के होते ही बिना किसी दफ्तर के चक्कर लगाए उन्हें पेंशन मिलनी शुरू हो जाए। सीएम ने विभाग को 'नवाचार' अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि पेंशनर्स की समस्याओं को सुनने के लिए कॉल सेंटर के जरिए उनसे सीधा संवाद किया जाए। उन्होंने वार्षिक आय के मानकों को और अधिक व्यावहारिक बनाने पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिल सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही

इस अवसर पर मौजूद समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। पेंशन वितरण में बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली और निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सरकार के इस कदम से न केवल लाभार्थियों को समय पर आर्थिक मदद मिली है, बल्कि प्रशासनिक कार्यकुशलता का भी एक सशक्त उदाहरण पेश किया गया है।

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