- by Vinita Kohli
- Nov, 06, 2025 06:31
प्रताप नगर: बेलगढ़ क्षेत्र में यमुना नदी की पटड़ी को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर कराए गए निर्माण कार्य अवैध खनन माफिया की मनमानी के चलते गंभीर खतरे में पड़ गए हैं। नदी के आसपास बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन से जमीन को खोखला किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि आसपास बसे दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, खनन माफिया रात-दिन बिना किसी डर के भारी मशीनों—हाइड्रोलिक मशीन (एचएम) और जेसीबी—के माध्यम से यमुना नदी की पटड़ी के बेहद करीब 30 से 50 फुट तक गहरे गड्ढे खोद चुके हैं। इस खुदाई के दौरान बड़ी मात्रा में माइनिंग मेटिरियल निकाली गई है। नदी की पटड़ी के पास इस तरह की गहरी खुदाई से पटड़ी के साथ लगती जमीन की प्राकृतिक मजबूती लगातार कमजोर होती जा रही है, जिससे बाढ़ के समय नदी में कटाव या पटड़ी टूटने की आशंका बन गई है।
अवैध खनन का सीधा असर बेलगढ़, नाथनपुर, कन्यावाला, लाकड़, भीलपुरा, कोलीवाला, नवाजपुर सहित कई गांवों पर पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यमुना नदी पहले ही उफान पर रहती है। यदि पटड़ी कमजोर हुई या कहीं से टूट गई, तो इन गांवों में बाढ़ आना तय माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन के कारण खेतों की जमीन धंसने लगी है और कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे पानी से भर चुके हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अवैध खनन की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र के एक किसान ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि रात के समय मशीनें चलती हैं और दिन में गड्ढे नजर आते हैं। लोग डर के साए में जीवन यापन कर रहे हैं। यदि नदी की पटड़ी टूट गई, तो फसल, घर और जान—माल सब कुछ खतरे में पड़ जाएगा।
नत्थनपुर और कन्यावाला के ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि खनन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें न प्रशासन का डर है और न ही कानून का। कई ग्रामीण दबंगों के डर से विरोध करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने ने बताया कि यदि अवैध खनन की शिकायत की जाती है तो कार्रवाई से पहले शिकायत कर्ता का नाम व पता माफिया तक पहुंच जाता है। नियमों के अनुसार अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी खनन विभाग, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और पंचायत विभाग की है। इसके बावजूद अब तक किसी भी विभाग द्वारा सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे प्रशासनिक जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही या मिलीभगत के चलते ही खनन माफिया खुलेआम सरकारी जमीन और नदी की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। अवैध खनन का असर केवल बाढ़ के खतरे तक सीमित नहीं है। इससे पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है। भू-जल स्तर प्रभावित हो रहा है, पेड़-पौधों की जड़ें कमजोर हो रही हैं और वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के आसपास इस तरह की गहरी खुदाई भविष्य में बड़े भू-धंसाव का कारण बन सकती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इंफोर्समेंट इंस्पेक्टर रोहतास ने बताया कि उन्होंने मौके का निरीक्षण किया है। अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई होती रहती है। फिर भी यदि क्षेत्र में कहीं भी अवैध खनन पाया गया, तो अवैध खनन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।