Chandigarh News: नई एक्साइज पॉलिसी जारी, देशी शराब और बीयर की कीमत में दो प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी
Mar 07, 2026 10:03 AM
चंडीगढ़: यूटी प्रशासन ने वर्ष 2026-27 के लिए नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। नई नीति के अनुसार, देशी शराब, आईएमएफएल (इंडियन मेड फॉरेन लिकर), भारतीय बीयर और भारतीय वाइन की एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (ईडीपी) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी महंगाई और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत को ध्यान में रखते हुए की गई है। हालांकि, यह बढ़ोतरी इम्पोर्टेड वाइन, इम्पोर्टेड बीयर और इम्पोर्टेड फॉरेन लिकर (आईएफएल) पर लागू नहीं होगी। नई पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होगी।
नई पॉलिसी के तहत शहर में कुल 97 रिटेल शराब ठेके होंगे। इन लाइसेंसिंग यूनिट्स के लिए रिजर्व प्राइस 454.35 करोड़ रुपये तय किया गया है। पिछले साल की तुलना में रिजर्व प्राइस में भी मामूली बढ़ोतरी की गई है। एक्साइज अधिकारियों के अनुसार, इस नई पॉलिसी का उद्देश्य शराब के कारोबार को नियंत्रित करना, शहर में रिटेल ठेकों की व्यवस्था मजबूत करना और उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा राशि और लाइसेंस फीस के नियम भी सख्त किए गए हैं। अब लाइसेंस लेने वालों को बोली राशि का 17% सिक्योरिटी अमाउंट जमा करना होगा। तय समय पर लाइसेंस फीस जमा न करने पर लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। नई एक्साइज पॉलिसी में कई अहम बदलाव किए हैं, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को सुविधा मिलेगी और निगरानी मजबूत होगी।
व्यापार को आसान बनाने के लिए अब कस्टम अप्रूव्ड बॉन्डेड वेयरहाउस चंडीगढ़ में होना जरूरी नहीं रहेगा। ये देश के किसी भी हिस्से में स्थित हो सकते हैं और एक साल के अनुभव की शर्त भी हटा दी गई है। सभी बॉन्डेड वेयरहाउस को अब एक्साइज पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और हर महीने आयात-निर्यात का विवरण जमा करना होगा।
नई पॉलिसी में रिटेल ठेकों के लिए कंट्री लिकर, आईएमएफएल और आईएफएल का कोटा पहले की तरह ही रहेगा। इसके साथ ही एल-10बी लाइसेंस को दोबारा शुरू किया जाएगा, जिससे बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स में भी शराब की बिक्री संभव हो सकेगी। इसका फायदा खासकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। निगरानी को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
रिटेल ठेकों और गोदामों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा और विभाग को उनकी लाइव फीड उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा, शराब के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाना भी जरूरी होगा। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों से व्यवस्था पारदर्शी बनेगी और राजस्व में स्थिरता आएगी, साथ ही व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए सुविधा बढ़ेगी।