चंडीगढ़ पुलिस के एएसआई और कॉन्स्टेबल निलंबित, गैंगस्टर कनेक्शन में पाई गई संदिग्ध भूमिका

Feb 18, 2026

चंडीगढ़: सेक्टर-32 स्थित सेवक फार्मेसी पर हुई फायरिंग के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने एएसआई अजयपाल उर्फ पाली और कॉन्स्टेबल अविनाश को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया है। विभागीय जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। इससे पहले क्राइम ब्रांच मुख्य साजिशकर्ता और शूटरों को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले का मुख्य आरोपी सेक्टर-46 निवासी राहुल बिष्ट है, जिसे क्राइम ब्रांच पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। बताया जा रहा है कि वह पहले सेक्टर-31 में एक लैब संचालित करता था और बाद में सेक्टर-32 में शिफ्ट हो गया था। आरोप है कि वह शहर के संपन्न लोगों की गतिविधियों पर नजर रखता था और उनके मोबाइल नंबर गैंगस्टरों तक पहुंचाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि राहुल बिष्ट के संबंध कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे साबा गोबिंदगढ़ से थे। प्रभावशाली लोगों के नंबर आगे भेजे जाने के बाद उन्हें भारी-भरकम रंगदारी की धमकियां दी जाती थीं। यदि कोई पीड़ित रकम देने से इंकार करता था तो उसे डराने के लिए फायरिंग जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता था। सेक्टर-32 की यह घटना भी इसी सिलसिले से जुड़ी मानी जा रही है।

सूत्रों का दावा है कि जब कुछ पीड़ित थाने में शिकायत लेकर पहुंचे तो उन्हें ठोस कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय कथित तौर पर डराया गया। बाद में एसआईटी के जरिए रंगदारी की रकम को लेकर समझौते की कोशिशें कराई जाती थीं। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

राहुल बिष्ट ने पूछताछ के दौरान यह भी दावा किया है कि कुछ सरकारी डॉक्टरों के नाम पर शहर के क्लबों और बाहरी स्थानों पर रेव पार्टियां आयोजित कराई जाती थीं। हालांकि, पुलिस ने अब तक इस संबंध में किसी भी नाम या स्थान का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।

एएसआई अजयपाल पाली पहले साइबर अपराध जांच प्रकोष्ठ में तैनात रह चुका है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये के बिटकॉइन लेनदेन विवाद में भी उसका नाम सामने आया था, हालांकि उस समय मामला शांत हो गया था। वर्ष 2014 में, जब वह कॉन्स्टेबल के पद पर था, उस पर लुधियाना में उगाही और अपहरण जैसे आरोप लगे थे। शिकायत के बाद मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में शिकायतकर्ताओं के मुकरने पर वह बरी हो गया था।

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