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चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में जनसंपर्क दिवस: लोकतांत्रिक संस्थाओं में कैसे बढ़ेगा विश्वास? विशेषज्ञों ने दिया मंत्र

Apr 23, 2026 5:33 PM

चंडीगढ़। आज के सूचना प्रधान युग में जहाँ एक क्लिक पर खबरें फैल जाती हैं, वहां किसी संस्था की प्रतिष्ठा को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी गंभीर विषय पर मंथन करने के लिए चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के 'यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज' (UIMS) में जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। "रणनीतिक प्रतिष्ठा प्रबंधन: लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास सुदृढ़ करना" विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम ने भविष्य के पत्रकारों और जनसंपर्क विशेषज्ञों को नैतिकता का पाठ पढ़ाया।

डिजिटल भटकाव और भ्रामक सूचनाओं पर कड़ा प्रहार

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रो वाइस चांसलर डॉ. देवेंद्र सिंह ने वर्तमान मीडिया परिदृश्य का एक ईमानदार खाका खींचा। उन्होंने कहा कि तकनीक ने हमें सूचनाएं तो दी हैं, लेकिन इसके साथ ही भ्रामक जानकारियों (Misinformation) का एक ऐसा अंबार भी लगा दिया है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ों को कमजोर कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि एक जनसंपर्क पेशेवर का असली काम केवल ब्रांडिंग करना नहीं, बल्कि जनता के बीच सत्य की स्थापना करना है।

दिग्गजों ने दिया 'सटीकता और नैतिकता' का मंत्र

विचार-विमर्श के सत्र में पत्रकारिता और पीआर जगत के बड़े नाम शामिल हुए। 'The Hindu Business Line' के वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने सरकारी जनसंपर्क और जनमत निर्माण में धारणा (Perception) की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं, पंजाब सिविल सचिवालय के उप निदेशक नवदीप गिल और जनसंपर्क विशेषज्ञ शिवांगी मल्होत्रा ने इस बात पर बल दिया कि जनविश्वास तभी कायम रह सकता है जब संवाद में पारदर्शिता और तथ्यों की सटीकता हो। 'मीडिया वाले' के संस्थापक मंतेश्वर कहलोन ने भी मीडिया नैतिकता के बदलते आयामों पर अपनी राय रखी।

'मॉक प्रेस कॉन्फ्रेंस' के जरिए सीखा संकट प्रबंधन

सिर्फ भाषणों तक सीमित न रहकर, कार्यक्रम को व्यावहारिक भी बनाया गया। विद्यार्थियों के लिए "स्पॉटलाइट क्राइसिस: मॉक प्रेस कॉन्फ्रेंस" नामक एक अनूठी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्रों ने काल्पनिक संकट स्थितियों में प्रेस को कैसे हैंडल किया जाए, इसकी बारीकियां सीखीं। इसके अलावा खेल पत्रकारिता और व्यावसायिक पत्रकारिता पर भी विशेष सत्र आयोजित हुए, जिसमें छात्रों ने विशेषज्ञों से तीखे सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासा शांत की।

"नैतिक संवाद ही भविष्य की कुंजी": डॉ. ज्योत्सना ठाकुर

संगोष्ठी का समापन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ज्योत्सना ठाकुर द्वारा विजेताओं को सम्मानित करने के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। अंत में नालंदा मंच की समन्वयक डॉ. चंचल सूरी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल एक उत्सव रहा, बल्कि इसने नई पीढ़ी के मीडिया कर्मियों को 'जिम्मेदार संवाद' की शपथ भी दिलाई।

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