मनीमाजरा–सेक्टर 26 के बीच सुखना चो पर हाई लेवल ब्रिज को मंजूरी, पीक आवर्स में जाम से मिलेगी राहत
Apr 23, 2026 8:49 PM
चंडीगढ़। मनीमाजरा और सेक्टर-26 के बीच
सुखना चो पर बनने वाले हाई लेवल पुल को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना के पूरा
होने के बाद पीक आवर्स में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और बारिश के दिनों में
ट्रैफिक डायवर्जन की समस्या भी खत्म हो जाएगी। यह
निर्णय यूटी के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया
गया, जिसमें
इंजीनियरिंग विभाग ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस पुल के बनने से
शहर के सड़क नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आम लोगों को बड़ी
राहत मिलेगी। फिलहाल इस मार्ग पर स्थित नीचा पुल लोगों के लिए परेशानी का कारण बना
हुआ है। पुल की चौड़ाई कम होने के चलते पीक आवर्स में लंबा जाम लग जाता है। वहीं, बारिश के
दौरान सुखना चो में जल स्तर बढ़ने पर यह रास्ता कई बार बंद करना पड़ता है, जिससे
आवागमन प्रभावित होता है।
करीब 16.63 करोड़
रुपये की लागत से बनने वाले इस पुल में दोहरे चार-लेन मार्ग के साथ पैदल यात्रियों
के लिए फुटपाथ और साइकिल ट्रैक की भी व्यवस्था होगी। परियोजना में आधुनिक निर्माण
तकनीक, बेहतर
जल निकासी प्रणाली और बाढ़ से सुरक्षा के विशेष उपाय शामिल किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार, पुल निर्माण
कार्य जुलाई 2026 से
शुरू होने की संभावना है और इसे 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मानसून के दौरान सुखना चो में जलस्तर बढ़ने से यह मार्ग अक्सर बंद हो जाता है, जिससे
यातायात बाधित होता है, सुरक्षा
संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। यह
मार्ग सुखना झील, सेक्टर-17, पीजीआई, पंजाब
यूनिवर्सिटी और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच के लिए बेहद अहम है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में जब सुखना
लेक से पानी छोड़ा गया था, तब पुराने पुल
को नुकसान पहुंचा था और कई दिनों तक यातायात बंद रहा था। मौजूदा पुल की ऊंचाई काफी
कम है, जिससे बरसात
में मलबा अटकने से पानी का बहाव बाधित हो जाता है। नए ब्रिज की ऊंचाई को इस तरह से
डिजाइन किया गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न हो। सर्वे के दौरान पानी के बहाव
के पैटर्न, मिट्टी के
नमूने, और टॉपोग्राफी
का अध्ययन किया गया ताकि ब्रिज की मजबूती और स्टेबिलिटी सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, वाहनों की
आवाजाही का भी विश्लेषण किया गया। खास कैमरों की मदद से ट्रैफिक का डाटा इकट्ठा
किया गया जिसमें वाहन के प्रकार और संख्या को दर्ज किया गया। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट
कंसल्टेंट की ओर से सौंपी गई थी जिसमें हाइड्रोलिक स्टडीज, टॉपोग्राफिकल सर्वे
और मिट्टी की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन शामिल था।
इंडस्ट्रियल एरिया–रेलवे स्टेशन पुल जर्जर, मरम्मत का इंतजार
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 को रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाला लो-लेवल पुल
पिछले तीन-चार वर्षों से जर्जर हालत में है, लेकिन नगर निगम का इंजीनियरिंग विंग अब तक इसकी
स्थायी मरम्मत नहीं कर सका है। पिछले साल भारी बारिश के दौरान पुल का एक हिस्सा
टूट गया था, जो
अब तक उसी स्थिति में पड़ा हुआ है। करीब
आठ महीने बीत जाने के बाद भी टूटे हुए हिस्से सुखना चो के अंदर ही पड़े हैं। मौके
पर दोनों ओर ड्रम लगाकर किसी तरह यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है, जबकि सड़क
कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। यह
लो-लेवल कॉजवे वर्ष 1998 में
बनाया गया था। पहली बार इसे जुलाई 2022 में भारी
बारिश और सुखना चो में पानी छोड़े जाने के कारण बड़ा नुकसान हुआ, जिससे इसके
विंग वॉल क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद 2023 और 2024 के मानसून
में भी पुल को बार-बार नुकसान पहुंचता रहा और कई बार इसे बंद करना पड़ा। वर्ष 2025 में एक बार
फिर भारी बारिश के दौरान इसकी स्थिति और खराब हो गई।