चंडीगढ़: समावेशी शिक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 100 से अधिक दृष्टिबाधित व्यक्तियों को एआई-सक्षम स्मार्ट विजन चश्मे वितरित किए गए। सेक्टर-14 स्थित ईवनिंग स्टडीज ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम ने डिजिटल समावेशन की दिशा में नई उम्मीद जगाई। 


यह पहल यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग द्वारा ‘प्रोजेक्ट दृष्टि परिवर्तन’ के अंतर्गत ब्लाइंड विजन फाउंडेशन के सहयोग से की गई। कार्यक्रम को एचडीएफसी बैंक के सीएसआर उपक्रम ‘परिवर्तन स्मॉल ग्रांट्स प्रोग्राम 2025–26’ के तहत समर्थन मिला। कार्यक्रम में पीयू की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि माधवी कटारिया ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक समावेशी विकास को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। वरिष्ठ अधिकारी अजय अरोड़ा, भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।



ऐसे काम करता है स्मार्ट विजन चश्मा

ये स्मार्ट विजन चश्मे पूरी तरह दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं। इन चश्मों में लगी इनबिल्ट कैमरा प्रणाली दृश्य को कैप्चर कर उसे ऑडियो आउटपुट में बदल देती है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में 59 भारतीय भाषाओं में रीडिंग मोड, करेंसी पहचान, चेहरे की पहचान, एआई आधारित वॉयस असिस्टेंट और नेविगेशन सहायता शामिल हैं। समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में समान अवसर प्रकोष्ठ  ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। 


समन्वय में विभागीय संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहयोग दिया। इन सहायक उपकरणों का निर्माण एसजीएच टेक्नोलॉजी ने किया, जबकि ब्लाइंड विजन फाउंडेशन बेंगलुरु द्वारा द्वारा बांटै गए। यह पहल न केवल तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यूनिवर्सिटी, सामाजिक संस्थाएं और कॉरपोरेट क्षेत्र मिलकर समाज के वंचित वर्गों के लिए सार्थक बदलाव ला सकते हैं।

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