Punjab News: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने की दो दिवसीय ‘अर्बन सिम्फनी 2026’ कॉन्क्लेव की मेजबानी
Apr 01, 2026 10:31 AM
मोहाली: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में अकादमिक और प्रोफेशनल कॉन्क्लेव अर्बन सिम्फनी 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दो-दिवसीय कार्यक्रम में ष्ग्लोबल समिटरू फ्यूचर रेडी इंडिया /2047 और ष्राउंड टेबल कांफ्रेंस शामिल रही। कार्यक्रम में जाने-माने आर्किटेक्ट, अर्बन प्लानर्स, विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, रिसर्चर, शिक्षाविद और इंडस्ट्री अग्रणियों ने मिलकर लचीले, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार तैयार शहरी विकास के लिए नवीन रणनीतियों, इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च और प्रगतिशील नीतिगत ढांचों पर विचार-विमर्श किया। अर्बन सिम्फनी 2026 की शुरुआत ष्ग्लोबल समिटरू फ्यूचर रेडी इंडिया /2047 के उद्घाटन के साथ हुई, जिसमें हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड दिल्ली की चीफ आर्किटेक्ट डॉ. नम्रता कलसी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. करण अवतार सिंह (आईएएस सेवानिवृत्त, पूर्व मुख्य सचिव, पंजाब सरकार), आईईई लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक डॉ. प्रभजोत कौर, डीआरओएनएच डायरेक्टर डॉ. शिखा जैन शामिल हुईं। इसके अलावा एंटरप्रेन्योर और द वेड एशिया की फाउंडर वर्तिका द्विवेदी, गदान्स्क टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी पोलैंड से प्रो. (डॉ.) डोरोता कामरोव्स्का-जालुस्का, सैपिएन्जा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम, इटली से प्रो. (डॉ.) एलियाना कैंगेली, प्रो. (डॉ.) वैलेरियो फोंट तथा प्रो. (डॉ.) मिशेल कंटेडुका, आईआईआईडी एवं आईआईए चंडीगढ़ के चेयरमैन मनमोहन खन्ना, एसडी शर्मा एवं एसोसिएट्स के प्रिंसिपल आर्किटेक्टएस.डी. शर्मा, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम और प्रो वाइस चांसलर वी.आर. रघुवीर भी मौजूद रहे।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रविराजा एन. सीताराम ने कहा, ‘अर्बन सिम्फनी 2026’ के दौरान‘ग्लोबल समिटरू फ्यूचर रेडी इंडिया /2047’ ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को एक साथ लचीली शहरी प्रणालियों, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर, विरासत-संवेदनशील विकास और भविष्योन्मुखी नियोजन ढाँचों पर विस्तृत चर्चा का अवसर दिया। ‘राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस’, पेरीअर्बन (शहरी) विकास और चुनौतियों के प्रबंधन पर केंद्रित रही। थिंक टैंक पहल ने अकादमिक और प्रोफेशनल क्षेत्र को जोड़कर नीति और व्यवहार के तालमेल पर जोर दिया तथा शहरों के भविष्य के लिए व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव प्रस्तुत किए।
उन्होंने आगे कहा,“‘राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस’ के दौरान, ‘अर्बन एज इनिशिएटिव’ के तहत एनएच-05 और भारतमाला रोड (एनएच 205ए) कॉरिडोर के साथ बदलते स्थानिक गतिशीलता पर भी चर्चा की गई। अर्बन सिम्फनी 2026 कॉन्क्लेव के दौरान, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने श्नेटवर्क ऑफ पीपल ऑफ कंस्ट्रक्शनश् (एनपीसी) के साथ एक एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों को इंडस्ट्री अनुभव, इंटर्नशिप एवं कौशल विकास के अवसर प्रदान करने के साथ साथ एक्सपर्ट्स द्वारा वर्कशॉप तथा मेंटरशिप प्रदान कर इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच के अंतर को समाप्त करना है।
इस से पूर्व अपने संबोधन में, मुख्य अतिथि हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड) की चीफ आर्किटेक्ट, नम्रता कलसी ने मेट्रो रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के दौरान अर्बन प्लानर्स के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा,“मेट्रो अब केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि शहर के विकास से जुड़ा प्रोजेक्ट बन गया है। शहर की सड़कों पर प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए विभिन्न शहरी प्राधिकरणों के साथ बीच तालमेल और सहयोग बहुत जरूरी लेकिन चुनौतीपूर्ण कार्य है। सडकों के नीचे गैस पाइपलाइन, सीवरेज लाइन, पानी की लाइन और सबसे महत्वपूर्ण डेटा केबल जैसी कई सुविधाएं होती हैं।
हर यूटिलिटी के मालिक की पहचान कर प्रबंधन और हस्तांतरण करना कठिन कार्य है,क्योंकि सभी के अपने-अपने वैधानिक नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। सैपिएन्जा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम में आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी और एनवायरनमेंटल डिजाइन की प्रोफेसर डॉ. एलियाना कैंगेली ने कहा, ष्शहरों को आज के समय की बड़ी चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन, सामाजिक और स्थानिक असमानताओं, और आवास से जुड़ी कमजोरियों को दूर कर ज्यादा समावेशी, सुलभ और मजबूत शहरी वातावरण बनाने की जरूरत है। इसी कारण शहरी डिजाइन सिर्फ सरकार तक ही सीमित नहीं रह सकता। ऐसे में आर्किटेक्ट्स की भूमिका बहुत अहम हो जाती है।
डॉ. करण अवतार सिंह रिटायर्ड, पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव) ने सुझाव दिया है कि एक्सप्रेसवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से होने वाले भूमि मूल्य वृद्धि के लाभार्थियों पर “बेटरमेंट चार्ज” या “बेटरमेंट लेवी” लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी इलाके में बड़े प्रोजेक्ट्स वहां की अर्थव्यवस्था को बदल देते हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स से आसपास की जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ जाती हैं, इसलिए जो लोग 5/10 साल बाद उस क्षेत्र में आते हैं या लाभ उठाते हैं, उन्हें सरकार को कुछ रकम देनी चाहिए , प्रो. (डॉ.) डोरोटा कामरोव्स्का जालुस्का, ने कहा, एआई-आधारित टूल्स आर्किटेक्ट्स के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं, क्योंकि ये बड़े पैमाने पर शहरी डेटा का विश्लेषण कर सस्टेनेबिलिटी, रेजिलियंस और इक्विटी जैसे लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करते हैं। डॉ. शिखा जैन ने अपने संबोधन में कहा कि “जयपुर जैसे 18वीं सदी के और चंडीगढ़ जैसे 1960 के दशक में योजनाबद्ध शहरों की जनसंख्या आज कई गुना बढ़ चुकी है। बढ़ते शहरीकरण के कारण, हम प्राकृतिक संसाधन खत्म करते जा रहे हैं जो इन ऐतिहासिक शहरों की योजना का हिस्सा थे।