CBSE का नया फरमान: अब हर स्कूल में होगी 'स्किल लैब', कक्षा 6 से ही बच्चे सीखेंगे कोडिंग और हुनर
Mar 23, 2026 12:50 PM
दिल्ली। देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई (CBSE) ने आने वाले 'मशीनी युग' की चुनौतियों को भांपते हुए स्कूली शिक्षा के ढर्रे में बड़े बदलाव का बिगुल फूंक दिया है। बोर्ड की ताजा गाइडलाइन के मुताबिक, अब हर सीबीएसई स्कूल के परिसर में एक 'कॉम्पोजिट स्किल लैब' का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के उद्देश्यों को जमीन पर उतारने के लिए लिया गया है। मकसद साफ है—छात्र केवल अंकों के लिए न लड़ें, बल्कि उनके हाथों में ऐसा हुनर हो जो उन्हें स्कूल से निकलते ही आत्मनिर्भर बना सके।
कक्षा 6 से ही शुरू होगी 'प्रैक्टिकल' पढ़ाई की नींव
बोर्ड के नए निर्देशों के तहत वोकेशनल यानी व्यावसायिक शिक्षा अब पढ़ाई का साइड हिस्सा नहीं, बल्कि मुख्य स्तंभ होगी। कक्षा 6वीं के छात्र अब क्लासरूम की थ्योरी के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल वर्क, आईटी, रिटेल और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों की बारीकियां सीधे लैब में सीखेंगे। इस कदम से पढ़ाई और असल जिंदगी के बीच का फासला कम होगा। अब स्कूल केवल परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि ऐसे 'स्किल हब' बनेंगे जहां विद्यार्थी मशीनों के साथ काम करना सीखेंगे और रोजगार के बाजार के लिए खुद को सक्षम बना पाएंगे।
लैब निर्माण के लिए समय सीमा तय, मान्यता पर रहेगा असर
सीबीएसई ने बुनियादी ढांचे को लेकर स्कूलों को स्पष्ट खाका दिया है। नए स्कूल जो सीबीएसई से संबद्धता (Affiliation) लेना चाहते हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से स्किल लैब तैयार करनी होगी। वहीं, पहले से चल रहे स्कूलों को राहत देते हुए बोर्ड ने 22 अगस्त 2027 तक का समय दिया है। स्कूलों को लैब के साइज में लचीलापन भी मिला है; वे चाहें तो 600 वर्ग फीट की एक साझी लैब बना सकते हैं या कक्षा 6-10 और 11-12 के लिए 400-400 वर्ग फीट की दो अलग लैब तैयार कर सकते हैं।
थ्योरी और प्रैक्टिकल का मिटेगा अंतर
यह स्किल लैब केवल एक कमरा नहीं होगी, बल्कि एक ऐसी प्रयोगशाला होगी जहां छात्र खुद प्रयोग करेंगे। बोर्ड ने सुरक्षा मानकों, जरूरी उपकरणों और संचालन की विस्तृत योजना भी साझा की है। स्कूल अपने बजट और जरूरत के हिसाब से उपकरणों का चयन कर सकेंगे। शिक्षाविदों का मानना है कि इस पहल से आने वाले सालों में स्कूलों से निकलने वाले विद्यार्थी न केवल डिग्रीधारी होंगे, बल्कि तकनीकी रूप से भी काफी सक्षम नजर आएंगे।