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Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन, जानिए चार सोमवार और प्रमुख तिथियां

Jun 12, 2026 2:11 PM

Sawan Jalabhishek Dates 2026 : भगवान शिव को समर्पित सावन माह 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान चार सावन सोमवार पड़ेंगे। वहीं सोम प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि, हरियाली तीज और नाग पंचमी जैसी कई विशेष तिथियां भी आएंगी, जिन्हें शिव पूजा और जलाभिषेक के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

मुख्य बिंदु

सावन माह 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा।

इस वर्ष सावन में 4 सोमवार पड़ेंगे।

10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि रहेगी।

28 अगस्त को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

सावन 2026 कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा?

सनातन धर्म में सावन माह का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और इसका समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन होगा।

इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शिव भक्त व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।

सावन में जलाभिषेक की परंपरा क्यों शुरू हुई?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर में बढ़ी उष्णता को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था।इसी घटना से सावन माह में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। आज भी लाखों श्रद्धालु सावन के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

सावन 2026 में कितने सोमवार पड़ेंगे?

सावन माह में सोमवार का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार पड़ेंगे।सावन सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को पड़ेंगे। इन दिनों शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है।

10 अगस्त का सोम प्रदोष व्रत क्यों है खास?सावन माह की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में 10 अगस्त का दिन शामिल है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार और सोम प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह संयोग भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर विशेष पूजा करते हैं।

सावन शिवरात्रि 2026 कब है?

सावन माह की शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। शिव भक्तों के लिए यह तिथि पूरे सावन की प्रमुख तिथियों में गिनी जाती है।

मान्यता है कि इस दिन की गई शिव पूजा विशेष फल प्रदान करती है। कई श्रद्धालु वैवाहिक सुख, पारिवारिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना लेकर व्रत और पूजा करते हैं।

हरियाली तीज और नाग पंचमी की क्या है महत्ता?

हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से उनके दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है।

इसके बाद 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व आएगा। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव से जुड़े नागों की पूजा करने से भय और नकारात्मकता दूर होती है।

भौम प्रदोष व्रत और सावन का अंतिम दिन

सावन माह में भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान बताया गया है।सावन माह का समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के अंतिम दिन किया गया जलाभिषेक भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाने वाला माना जाता है।

सावन में कौन-कौन सी तिथियां सबसे शुभ मानी जाती हैं?सावन 2026 में 10 अगस्त का सोम प्रदोष व्रत, 11 अगस्त की सावन शिवरात्रि, 15 अगस्त की हरियाली तीज, 17 अगस्त की नाग पंचमी, 25 अगस्त का भौम प्रदोष व्रत और 28 अगस्त की सावन पूर्णिमा प्रमुख तिथियों में शामिल हैं।इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। इसी वजह से सावन माह को भगवान शिव की भक्ति का सबसे महत्वपूर्ण काल माना जाता है।

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