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हरियाणा की बेटी इप्सिता का ‘बर्न इट डाउन’ गाना बना ’नारी शक्ति’ की पहचान, बर्न इट डाउन गाने में लैंगिक असमानता पर कड़ा प्रहार

Mar 24, 2026 8:10 PM

चंडीगढ़: रैपर बादशाह अपने विवादित ‘टटीरी’ गीत को लेकर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने के आरोपों में घिरे हुए हैं, वहीं हरियाणा के पंचकूला की बेटी गीतकार और कलाकार इप्सिता का ‘बर्न इट डाउन’ गाना नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभरा है। 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लांच हुआ ‘बर्न इट डाउन’ गाना सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है। अब तक दो सप्ताह में गाने को यू-ट्यूब पर 2.3 मिलियन देखा गया है तो 52 हजार से ज्यादा लाइक मिले हैं। गाने में लैंगिक असमानता पर कड़ा प्रहार किया गया है। फिलहाल गाना यू ट्यूब से लेकर इंस्टाग्राम पर ट्रेंडिंग में चल रहा है। 

प्रतिस्पर्धा के दौरे में कलाकारों की आपत्तिजनक प्रस्तुतियां सवालों के घेरे में आ रही हैं तो बर्न इट डाउन गाने ने समाज को दिशा देने के साथ बदलाव की सार्थकता को बढ़ाया है। बर्न इट डाउन की गीतकार इप्सिता ने संगीत और सिनेमाई कहानी में सीधे तौर पर पितृसत्तात्मक व्यवस्थाओं पर कड़ा प्रहार किया है। 

गाने में दिखाया गया है कि किस प्रकार महिलाओं के जीवन को पुरुष प्रधान व्यवस्था कम उम्र से ही प्रभावित करती रहती हैं। गाने के माध्यम से लैंगिक असमानता के मुद्दे का प्रस्तुतीकरण समाज को झकझोरने वाला है।

महिलाओं की आवाज को बुलंद करते गीत के बोल

मौजूदा समय में चंडीगढ़ के सेक्टर-7 में रह रही इप्सिता बताती हैं कि गीत में दिखाया गया है कि महिलाओं पर थोपी गई पिंजरों, पर्दों और अपेक्षाओं की कहानी एक विद्रोह तक पहुंचती है। 

इसमें फिल्माया गया है कि "अब मुझे इसे जलाते हुए देखो। इप्सिता ने अपने गाने के जरिये उन महिलाओं को श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने शांत संघर्ष किया है, जिनका कहीं वर्णन नहीं है, जो बिना किसी प्रसिद्धि के पूरी दुनिया का बोझ अपने कंधों पर उठाती हैं। 

इसी भावना के साथ, बर्न इट डाउन न केवल प्रत्यक्ष उत्पीड़न का विरोध करने वाली महिलाओं को समर्पित है, बल्कि उन महिलाओं को भी समर्पित है जो अदृश्य बोझ से जूझ रही हैं, वे महिलाएं जिनका श्रम, दर्द और सहनशीलता अक्सर अनदेखी रह जाती है।

वीडियो में चौकाने वाले आंकड़े

इप्सिता ने गाने के माध्यम से चौकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं कि विश्व भर में 73.6 करोड़ महिलाओं ने शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया है। वैश्विक स्तर पर 13 करोड़ लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। 

महिलाएं वैश्विक स्तर पर 75 प्रतिशत अवैतनिक देखभाल और घरेलू कार्य करती हैं। अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देने के बावजूद, इस कार्य की गिनती शायद ही कभी की जाती है और इसके लिए कभी भुगतान नहीं किया जाता।

लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स से विज्ञान में एमएससी डिग्री धारक हैं इप्सिता

इप्सिता गायिका-गीतकार और अभिनेत्री हैं, जिनका काम पॉप, प्रदर्शन और सामाजिक टिप्पणी के संगम पर आधारित है। येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान में छात्रवृत्ति के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 

प्रदर्शन कला में उनके योगदान के लिए वी. ब्राउन आयरिश पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से व्यवहार विज्ञान में एमएससी की उपाधि प्राप्त की। 

संगीत और फिल्म को पूर्णकालिक रूप से अपनाने से पहले, इप्सिता ने यूनिसेफ, गेट्स फाउंडेशन और विश्व बैंक सहित संगठनों के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यवहार परिवर्तन के क्षेत्र में काम किया।

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