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फतेहाबाद के मताना गांव पर टूटा दुखों का पहाड़: राजस्थान में भीषण सड़क हादसा, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत

Jun 15, 2026 5:42 PM

फतेहाबाद। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस घर में दो हफ्ते पहले ही मुखिया की सम्मानजनक सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का जश्न मनाया जा रहा था, आज वहां से एक साथ छह अर्थियां उठने की नौबत आ गई है। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के मताना गांव का एक हंसता-खेलता परिवार राजस्थान के बीकानेर जिले में काल का ग्रास बन गया। सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे श्रीडूंगरगढ़ थाना इलाके के हेमासर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार सवार छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी भयानक थी कि स्विफ्ट डिजायर कार लोहे के मलबे में तब्दील हो गई और सड़क पर कई फीट दूर तक टायरों के घिसटने के गहरे काले निशान छूट गए, जो चीख-चीख कर हादसे की भयावहता बयां कर रहे थे।

मताना गांव के रिटायर्ड अधिकारी ओमप्रकाश चला रहे थे कार, पलक झपकते ही उजड़ गया संसार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मताना गांव की भोडिया रोड स्थित ढाणी के रहने वाले ओमप्रकाश सुथार (60) बीते रविवार को ही अपनी गाड़ी से परिवार को लेकर बिश्नोई समाज के पवित्र तीर्थ मुकाम धाम के लिए रवाना हुए थे। ओमप्रकाश खुद ही स्टीयरिंग संभाल रहे थे। रविवार देर रात मुकाम पहुंचने के बाद पूरे परिवार ने सोमवार सुबह तड़के भगवान जंभेश्वर के दर्शन किए, धोक लगाई और मन्नतें मांगीं। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुकाम धाम से फतेहाबाद के लिए सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा। दोपहर को हेमासर के नजदीक सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को अपनी चपेट में ले लिया।

मौके पर मची चीख-पुकार, मासूमों समेत इन 6 लोगों की गई जान

धमाका इतना तेज था कि आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और राहगीर सहम गए। स्थानीय नागरिकों की सूचना पर पहुंची श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने कटर और क्रेन की मदद से क्षत-विक्षत हो चुकी कार को काटकर शवों को बाहर निकाला। हादसे में कार चालक ओमप्रकाश सुथार, उनकी पत्नी सोरमा देवी (55), बेटी प्रमिला (30), दो मासूम दोहतियां यशवी (10) व खुशी (8) और महज 4 साल के इकलौते पोते रोनित की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, कार में सवार तीसरी दोहती तन्वी की सांसें अभी चल रही थीं, जिसे लहूलुहान हालत में तुरंत श्रीडूंगरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते डॉक्टरों ने उसे बीकानेर के पीबीएम अस्पताल रेफर कर दिया है।

15 दिन पहले ही मिली थी विदाई; गांव में छाया सन्नाटा

ताना गांव के सरपंच दलबीर वर्मा ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ओमप्रकाश सुथार बेहद मिलनसार और सुलझे हुए इंसान थे। वे इसी साल 31 मई को फतेहाबाद के डीडीपीओ (DDPO) कार्यालय से सीनियर अकाउंटेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद वे परिवार की सुख-शांति के लिए गुरु जंभेश्वर के दर पर आशीर्वाद लेने गए थे। हादसे की भनक लगते ही मताना गांव में चूल्हे ठंडे पड़ गए और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के कई लोग और रिश्तेदार तुरंत घटनास्थल और बीकानेर अस्पताल के लिए रवाना हो गए हैं, जहां शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।

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