CM Naib Saini का सख्त आदेश: 1 साल में घाटे से बाहर आएं हरियाणा की सहकारी चीनी मिलें, वरना नपेंगे अफसर
Jun 03, 2026 11:08 AM
हरियाणा। हरियाणा के सहकारिता क्षेत्र में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और कड़े फैसलों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रदेश की सभी सहकारी चीनी मिलों की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें अगले एक साल के भीतर घाटे से बाहर निकलने का अल्टीमेटम दे दिया है। हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि हर एक मिल की गहन समीक्षा की जाएगी, कमियां दूर होंगी और लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने साफ किया कि इन मिलों से सीधे प्रदेश के लाखों किसानों का हित जुड़ा है, इसलिए इनका आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।
जब प्राइवेट मिलें मुनाफे में, तो सरकारी क्यों कर्जदार? सीएम ने दागे तीखे सवाल
बैठक में मुख्यमंत्री का रुख बेहद आक्रामक रहा और उन्होंने विभाग के आला अधिकारियों के सामने सीधा सवाल दाग दिया। सीएम ने पूछा कि जब राज्य की निजी चीनी मिलें लगातार फायदे में चल रही हैं, तो आखिर सरकारी मिलें हर साल करोड़ों के घाटे में क्यों जा रही हैं? सरकार अब तक इन सहकारी चीनी मिलों को संकट से उबारने के लिए 632 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय सहायता दे चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस स्थिति पर असंतोष जताते हुए मिलों में जमे बैठे निष्क्रिय और कामचोर अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
एथेनॉल और बायोगैस प्लांट से बदलेगी तस्वीर, आईटीआई में शुरू होंगे खास कोर्स
घाटे से उबरने के लिए अब मिलों के पारंपरिक ढर्रे को बदला जाएगा। मुख्यमंत्री ने मिलों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ वहां एथेनॉल और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करने की योजना की रफ्तार बढ़ाने को कहा है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले वित्तीय वर्ष तक सभी सहकारी चीनी मिलों में सीबीजी प्लांट चालू कर दिए जाएं ताकि आमदनी के नए स्रोत खुल सकें। इसके अलावा, मिलों में कुशल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए प्रदेश के आईटीआई (ITI) संस्थानों में चीनी उद्योग से जुड़े विशेष तकनीकी कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को सीधा रोजगार भी मिलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट: महिलाओं को लीज पर मिलेगी पंचायत भूमि
चीनी मिलों के कायाकल्प के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए भी कई बड़े फैसले लिए हैं। प्रदेश में बड़े पैमाने पर नई डेयरी सहकारी समितियां बनाई जाएंगी। सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह है कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को डेयरी संचालन और चारा उत्पादन के लिए पंचायत की जमीन लीज पर दी जाएगी। पशुधन को चारे के संकट से बचाने के लिए एक दीर्घकालिक और पुख्ता रणनीति तैयार करने के आदेश भी सहकारिता विभाग को दे दिए गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और ग्रामीण रोजगार में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।