हरियाणा के एक लाख युवाओं के लिए बड़ी खबर: एआई ट्रेनिंग के 474 करोड़ के प्रोजेक्ट को सीएम की मंजूरी
Apr 09, 2026 12:08 PM
हरियाणा। हरियाणा अब खेती और खेलों के साथ-साथ भविष्य की तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भी दुनिया को राह दिखाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में 'हरियाणा एआई डेवलपमेंट प्रोग्राम' की समीक्षा करते हुए करीब 474 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। विश्व बैंक के सहयोग से चलने वाली इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के एक लाख युवाओं को एआई की बारीकियों में माहिर बनाना है, ताकि वे वैश्विक रोजगार बाजार में मजबूती से खड़े हो सकें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम केवल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश में 100 से अधिक नए स्टार्टअप्स को जन्म देने और उन्हें आगे बढ़ाने का जरिया भी बनेगा।
पंचकूला और गुरुग्राम बनेंगे ग्लोबल टेक डेस्टिनेशन
इस प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा में दो प्रमुख एआई केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो राज्य की तकनीकी तस्वीर बदल देंगे। पंचकूला में 'सा टेक्नोलॉजी पावर ऑफ इंडिया' के सहयोग से 'हरियाणा एडवांस्ड कंप्यूटिंग फैसिलिटी' तैयार की जाएगी। वहीं, साइबर सिटी गुरुग्राम में 'नासकॉम' (NASSCOM) के साथ मिलकर 'ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर' की नींव रखी जाएगी। यह सेंटर न केवल स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन की सुविधा देगा, बल्कि उद्योगों के साथ मिलकर नई तकनीक पर शोध और नवाचार का मंच भी तैयार करेगा। सरकार एआई इनोवेशन 'सैंडबॉक्स' पर भी काम कर रही है, जो निवेश से पहले नई तकनीकों के परीक्षण का एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म साबित होगा।
विश्व बैंक की टीम ने किया दौरा, जून में आएगी फाइनल रिपोर्ट
इस मेगा प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व बैंक की मिशन टीम ने हाल ही में 6 और 7 अप्रैल को पंचकूला का दौरा कर तकनीकी संभावनाओं को तलाशा है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग ने इस प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रिपोर्ट को पहले ही हरी झंडी दे दी है। अब आगामी जून तक इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने की उम्मीद है। विभिन्न सरकारी विभागों से एआई के उपयोग को लेकर सुझाव मांगे गए हैं, जिसके लिए 15 दिन की समय सीमा तय की गई है। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा जहाँ एआई के जरिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सके।
भविष्य की तैयारी: स्किलिंग से लेकर इनक्यूबेशन तक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज का युग तकनीक का है और हरियाणा इसमें पीछे नहीं रह सकता। यह प्रोग्राम पीपीपी (PPP) मॉडल पर आधारित है, जिससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का पूरा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। 'सैंडबॉक्स' प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में एआई समाधानों की पहचान, सत्यापन और पायलट परीक्षण किया जाएगा, जो पूरी तरह से विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित होगा। जानकारों का मानना है कि इस कदम से हरियाणा न केवल उत्तर भारत बल्कि पूरे देश में एआई और डेटा साइंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।