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Haryana NCR Boundary News: सीएम नायब सिंह सैनी का बड़ा फैसला, हरियाणा के किसी भी जिले को एनसीआर से बाहर नहीं किया जाएगा

Jun 16, 2026 3:42 PM

हरियाणा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल हरियाणा के जिलों के भविष्य को लेकर पिछले काफी समय से चल रही सियासी और प्रशासनिक उठापटक पर आखिरकार विराम लग गया है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सीधे तौर पर ऐलान किया है कि राज्य के मौजूदा एनसीआर क्षेत्र (बाउंड्री) में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दोटूक बयान के साथ ही उन तमाम प्रस्तावों और चर्चाओं की फाइलें बंद हो गई हैं, जिनमें यह कहा जा रहा था कि हरियाणा के कुछ दूरदराज के जिलों को एनसीआर के नक्शे से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

100 किलोमीटर के दायरे वाले फॉर्मूले की हवा निकली, राहत की उम्मीदों को झटका

दरअसल, बीते कुछ समय से इस बात की पुरजोर अटकलें लगाई जा रही थीं कि दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर की हवाई दूरी (रेडियस) से बाहर पड़ने वाले हरियाणा के कुछ हिस्सों को एनसीआर की सूची से हटा दिया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा था कि इन पिछड़े और दूरदराज के इलाकों को एनसीआर के बेहद कड़े नियमों से आजादी मिल सकेगी, जिससे वहां विकास कार्यों को रफ्तार दी जा सके। स्थानीय स्तर पर भी नियमों में ढील की मांग उठ रही थी। मगर, बोर्ड की बैठक में गहन मंथन के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने सारे कयासों को खारिज करते हुए कहा, "आज की बैठक में सर्वसम्मति से यह तय कर लिया गया है कि एनसीआर के मौजूदा एरिया में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।"

क्या होंगे इस बड़े फैसले के सियासी और आर्थिक मायने?

मुख्यमंत्री के इस फैसले को प्रशासनिक और आर्थिक दूरदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। एनसीआर का दायरा कम न होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हरियाणा के सभी 14 जिलों को बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाला मोटा फंड पहले की तरह ही जारी रहेगा। दिल्ली से सटे इन जिलों में मेट्रो का विस्तार, बड़े एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ की तर्ज पर बनने वाली रैपिड रेल (RRTS) जैसी अरबों रुपये की मेगा परियोजनाओं की रफ्तार धीमी नहीं पड़ेगी। केंद्र से मिलने वाली इस वित्तीय मदद के बिना हरियाणा के लिए इन सेक्टर्स में अकेले निवेश करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता।

प्रदूषण और पर्यावरण के कड़े पहरे में ही जिएंगे एनसीआर के लोग

एक तरफ जहां इस फैसले से बड़े प्रोजेक्ट्स को संजीवनी मिली है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को फिलहाल प्रदूषण के कड़े नियमों से राहत मिलती नहीं दिख रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के वो तमाम नियम, जो दिल्ली पर लागू होते हैं, वे हरियाणा के इन 14 जिलों में भी पूरी सख्ती से प्रभावी रहेंगे। इसका मतलब यह है कि सर्दियों के दिनों में प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण कार्यों (कंस्ट्रक्शन) पर लगने वाली पाबंदी जारी रहेगी।

साथ ही, नेशनल हाईवे पर दहाड़ने वाले 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर जो प्रतिबंध लगा है, वह भी ज्यों का त्यों रहेगा। इसके अलावा, बैठक में पर्यावरण सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सरकार ने साफ किया कि अरावली की पहाड़ियों और नेचुरल कंजर्वेशन जोन (NCZ) के साथ कोई भी व्यावसायिक छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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