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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: किसानों को पट्टे पर मिलेगी 800 एकड़ जमीन, साथ में ₹50,000 की मदद

May 14, 2026 11:37 AM

हरियाणा। हरियाणा की उपजाऊ मिट्टी को रसायनों से मुक्त करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने घोषणा की है कि कृषि विभाग की करीब 800 एकड़ खाली पड़ी जमीन अब किसानों के हवाले की जाएगी। इस जमीन को आगामी 10 वर्षों के लिए पट्टे (लीज़) पर दिया जाएगा, लेकिन शर्त सिर्फ एक है—इस भूमि पर केवल प्राकृतिक या जैविक खेती ही करनी होगी। सरकार का यह कदम उन प्रगतिशील किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो अपनी जमीन की कमी के कारण बड़े स्तर पर जैविक खेती नहीं कर पा रहे थे।

50 हजार की सब्सिडी और प्रमाणीकरण का झंझट खत्म

योजना की बारीकियों पर गौर करें तो प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को आर्थिक मोर्चे पर भी संबल दिया जाएगा। सरकार प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता राशि पांच साल तक देगी, यानी एक किसान को कुल 50 हजार रुपये की मदद मिलेगी। अक्सर देखा गया है कि जैविक खेती करने वाले किसान 'सर्टिफिकेशन' के लिए निजी एजेंसियों के चक्कर काटकर थक जाते हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार ने 'हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी' को ही अधिकृत संस्था के रूप में नामित करने का फैसला लिया है। अब किसानों को घर बैठे सरकारी ठप्पा मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

मंडियों में मिलेगा 'स्पेशल स्पेस' और मॉडर्न लैब की सुविधा

सिर्फ पैदावार बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना भी प्राथमिकता है। इसी कड़ी में पंचकूला, करनाल, गुरुग्राम और हिसार समेत प्रदेश के 10 जिलों की मंडियों में जैविक उत्पादों के लिए विशेष काउंटर और स्थान आरक्षित किए जाएंगे। कृषि विपणन बोर्ड इन मंडियों में आधुनिक प्रयोगशालाएं भी स्थापित करेगा, जहाँ उपज की गुणवत्ता जांची जाएगी। कृषि मंत्री के मुताबिक, 'एपीडा' (APEDA) से मान्यता प्राप्त इन लैब के जरिए हरियाणा के जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे विदेशों में भी हरियाणा के 'ऑर्गेनिक ब्रांड' की धमक सुनाई देगी।

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