Rajasthan Weather Update: जयपुर में रात में भी नहीं मिल रही गर्मी से राहत, दिन में दुबई-आबूधाबी से ज्यादा गर्मी, हीटस्ट्रोक का खतरा
May 14, 2026 11:32 AMWeather Update: जयपुर इस समय भीषण गर्मी और बढ़ते थर्मल जोखिम के दौर से गुजर रहा है। दिन ही नहीं, बल्कि रात में भी शहर भट्ठी की तरह तप रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (CSE) की इंडिया एन्वायरमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार राजधानी जयपुर के 13 प्रतिशत वार्ड हाई और एक्सट्रीम हीट जोन में पहुंच चुके हैं। इन इलाकों में रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर के करीब 48 प्रतिशत वार्ड मध्यम स्तर के हीट स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक और शरीर के कई अंगों के प्रभावित होने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
दुबई और आबूधाबी से ज्यादा गर्म जयपुर
विशेषज्ञों के अनुसार बीते एक सप्ताह में जयपुर का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। यह तापमान दुबई और आबूधाबी जैसे रेगिस्तानी शहरों से भी अधिक है, जहां इसी अवधि में औसत तापमान 38 डिग्री से नीचे रहा। रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर में दिन और रात दोनों समय तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों में गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। मानसरोवर और झोटवाड़ा जैसे क्षेत्रों में सामान्य तापमान से करीब 12 डिग्री अधिक गर्मी दर्ज की गई है। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और रात में भी राहत नहीं मिल रही।
हर वार्ड में बढ़ा थर्मल जोखिम
CSE की रिपोर्ट के अनुसार जयपुर के सभी वार्ड किसी न किसी स्तर पर थर्मल जोखिम की चपेट में हैं। थर्मल जोखिम का मतलब है कि बढ़ती गर्मी के कारण लोगों में बीमारियों की संभावना बढ़ रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। हीटस्ट्रोक के मामलों में तेजी आने की आशंका जताई गई है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने से शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र प्रभावित हो सकता है। इससे डिहाइड्रेशन, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर असंतुलन और शरीर के कई अंगों के फेल होने तक का खतरा बढ़ जाता है।
बदली शहर की संरचना बनी वजह
विशेषज्ञ मानते हैं कि जयपुर के गर्मी के जाल में फंसने की सबसे बड़ी वजह शहर की बदलती संरचना है। कभी अपनी जलवायु अनुकूल वास्तुकला के लिए पहचान रखने वाला जयपुर अब तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदल रहा है। पुराने शहर की हवेलियां, चौक, आंगन, मोटी दीवारें और छज्जे प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम की तरह काम करते थे। इसके अलावा तालाब और बावड़ियां शहर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करती थीं। बिना एयर कंडीशनर के भी घरों के भीतर ठंडक बनी रहती थी। लेकिन पिछले दो दशकों में तेजी से हुए शहरीकरण ने इस व्यवस्था को कमजोर कर दिया। हरियाली कम हुई, खुले क्षेत्र सिमट गए और पारंपरिक जल स्रोत खत्म होते चले गए।
अर्बन हीट आइलैंड बना जयपुर
विशेषज्ञों ने जयपुर में बढ़ती गर्मी को “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव का नतीजा बताया है। इसका मतलब है कि शहर के कुछ हिस्से आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हो जाते हैं। कंक्रीट की सड़कें, इमारतों की छतें और दीवारें दिनभर सूरज की गर्मी सोखती रहती हैं और रात तक धीरे-धीरे उसे छोड़ती हैं। इसी वजह से अब जयपुर में रात के समय भी तापमान तेजी से नीचे नहीं गिरता। विशेषज्ञ इसे “हीट ट्रैप इफेक्ट” कहते हैं। उनका कहना है कि अगर शहर में हरियाली, जल संरक्षण और पारंपरिक वास्तुकला आधारित निर्माण को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। दिन के समय धूप में निकलने वालों को हीटस्ट्रोक का जोखिम अधिक है। विशेषज्ञ लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है। अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मामलों पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान से निपटने के लिए शहर स्तर पर दीर्घकालिक योजना तैयार करना जरूरी हो गया है।