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करनाल में घूसखोर SI गिरफ्तार: डिपो होल्डर्स से वसूलता था 10% कमीशन, पत्नी हैं BJP नेता

May 14, 2026 11:26 AM

करनाल। करनाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ स्टेट विजिलेंस (ACB) की बड़ी कार्रवाई ने जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार, जिन्हें हाल ही में कुंजपुरा सेंटर की जिम्मेदारी मिली थी, अब सलाखों के पीछे हैं। विजिलेंस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी एसआई ने पद संभालते ही उगाही का अपना एक समानांतर 'रेट कार्ड' तैयार कर रखा था। बताया जा रहा है कि मनोज हर डिपो होल्डर से राशन का 10 प्रतिशत कमीशन और रूटीन चेकिंग के नाम पर 4 हजार रुपये की बंधी-बंधाई रकम वसूलता था।

रसूखदार बैकग्राउंड: पत्नी भाजपा नेता और सीएम विंडो की सदस्य

इस मामले में सबसे दिलचस्प पहलू आरोपी का पारिवारिक और राजनीतिक जुड़ाव है। मनोज कुमार की पत्नी सुनील मोर भाजपा की सक्रिय नेता हैं और फिलहाल मधुबन मंडल में 'एमिनेंट पर्सन' के तौर पर तैनात हैं। एमिनेंट पर्सन का काम आम जनता की शिकायतों को सीएम विंडो के जरिए हल करवाना होता है, लेकिन विडंबना देखिए कि जिस घर से न्याय की उम्मीद की जा रही थी, उसी घर का मुखिया भ्रष्टाचार के खेल में लिप्त पाया गया। सूत्रों की मानें तो सुनील मोर निकाय चुनाव में वार्ड-6 से भाजपा की टिकट पर दावेदारी भी पेश कर चुकी हैं, हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिल सका था।

चेकिंग का खौफ दिखाकर मांगी थी 15 हजार की घूस

पूरा मामला तब खुला जब एक डिपो होल्डर विकास ने हिम्मत दिखाई। एसआई मनोज ने विकास के डिपो पर चेकिंग के दौरान महज 4 किलो अनाज की कमी को रिकॉर्ड में कई क्विंटल दिखाकर डराना शुरू कर दिया। इस 'कागजी खेल' को ठीक करने के बदले 15 हजार रुपये की डिमांड की गई। विकास ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय कुरुक्षेत्र विजिलेंस को इसकी भनक दे दी। इंस्पेक्टर नन्ही देवी के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही कुंजपुरा बस अड्डे पर नोटों की गड्डी मनोज के हाथ में पहुंची, विजिलेंस ने उसे दबोच लिया।

फौजी से रिश्वतखोर बनने का सफर, अब जांच की आंच औरों तक

मनोज कुमार सेना से रिटायर होने के बाद इस विभाग में आए थे, लेकिन वर्दी का अनुशासन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। विजिलेंस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी ने महज कुछ ही दिनों की पोस्टिंग में डिपो होल्डर्स पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। अब पुलिस और एसीबी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इस वसूली तंत्र में विभाग के कुछ और बड़े अधिकारी भी शामिल थे? फिलहाल, कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन के लिए जिला जेल भेज दिया है, जिससे विभाग के अन्य 'काली कमाई' करने वाले कर्मियों में हड़कंप मचा है।

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